मॉडल रेलवे स्टेशन से मुंबई और दिल्ली जाने वाले रेल यात्री धक्के खाते हुए अपनी यात्राएं पूरी कर रहे हैं। यहां से बनकर चलने वाली दोनों ही ट्रेनों में एसी और स्लीपर के अतिरिक्त कोच लगाने का वादा इसी मंडल के सुलतानपुर के लंभुआ निवासी मुख्य वाणिज्य प्रबंधक ने किया था। करीब दो साल बाद भी यात्रियों की मुसीबतें दूर नहीं हो सकी हैं।
सूत्रों की मानें तो फैजाबाद से प्रतिदिन चल रही दिल्ली एक्सप्रेस तथा रविवार और गुरुवार को मुंबई के लिए छूटने वाली साकेत एक्सप्रेस में कुल 19 कोच लगते हैं। साकेत में 11 स्लीपर, तीन जनरल, तीन एसी तथा दो एसएलआर तो दिल्ली एक्सप्रेस में आठ कोच स्लीपर, पांच जनरल, चार एसी और दो एसएलआर कोच लगते हैं। करीब डेढ़ साल पहले तक दिल्ली एक्सप्रेस में पांच एसी कोचें लगती थीं, लेकिन अब ट्रेन चार एसी कोच के साथ रवाना हो रही है।
दोनों ही ट्रेनों में आरक्षित और अनारक्षित सीट पाने की मारामारी मचती है। दिल्ली एक्सप्रेस का हाल है कि इसमें 15 दिन से पहले कन्फर्म सीट पाना मुश्किल है। मुंबई में सीट के लिए डेढ़ महीने पूर्व आरक्षण कराना यात्रियों की मजबूरी है। दोनों ही ट्रेनों में बिना आरक्षण पाये तीन से चार सौ यात्री यात्रा करते हैं।
जनरल बोगी में तो ऐसे यात्रियों की संख्या हजार को पार कर जाती है। बुकिंग काउंटर की मानें तो गुरुवार को मुंबई रवाना हुई साकेत एक्सप्रेस में जनरल टिकट दो हजार के करीब बिके थे। कोच में प्रवेश न पाने पर तमाम यात्रियों ने रिफंड लिया था। स्लीपर में 72 सीटें होती हैं।
इसमें करीब पचास लोगों ने वेटिंग में यात्रा की। एसी में 44 की सीट पर साठ यात्री यात्रा को मजबूर हुए थे। सन् 2014 में आए मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (सीसीएम) देवमणि दुबे ने साकेत में चार (तीन स्लीपर, एक एसी) कोच और दिल्ली एक्सप्रेस में तीन (दो स्लीपर, एक एसी) अतिरिक्त कोच लगवाए जाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका।
दोनों ही ट्रेनों में यात्रियों की संख्या के सापेक्ष आरक्षित और अनारक्षित कोचों की संख्या निश्चित रूप से कम है। इसका अनुपालन अप्रैल मई तक होगा। ऐसा होने पर आरक्षित कोचों में यात्रा करने वाले यात्रियों की दुश्वारियां काफी कम होंगी। अनारक्षित कोचों में यात्रा करने वालों की मुश्किलें दूर होना अभी संभव नहीं है।