दिगंबर अखाड़ा में पुजारी के साथ मौजूद योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो)
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ का रामनगरी से गहरा नाता रहा है। रामनगरी में पहुंचने पर उनका व उनके गुरू ब्रह्मलीन अवैद्यनाथ का पहला ठिकाना दिगंबर अखाड़ा ही रहा है, जो आज भी अयोध्या पहुंचने पर बदस्तूर जारी है।
रामलला के प्राकट्य प्रसंग से योगी के बाबा गुरु दिग्विजयनाथ के समय से गोरक्षपीठ और रामनगरी का अटूट संबंध माना जाता है। बाबा गुरु दिग्विजयनाथ व गुरु महंत अवैद्यनाथ की राम मंदिर आंदोलन के श्लाका पुरुष दिगंबर अखाड़े के महंत परमहंस स्व. रामचंद्र दास से मित्रवत निकटता धार्मिक व राजनीतिक हलकों में आए दिन सुर्खियों में रहती थी।
माना जाता है कि रामलला के प्राकट्य घटनाक्रम के दौरान महंत दिग्वजय नाथ परमहंस रामचंद्र दास के प्रमुख सहयोगियों में शामिल रहे हैं। महंत अवैद्यनाथ के समय से ही योगी का संबंध दिगंबर अखाड़े से जुड़ा और जब अयोध्या पहुंचते तो परमहंस रामचंद्र दास की शरण में पहुंच उनका आशीर्वाद जरूर प्राप्त करते।
अयोध्या प्रवास भी वह दिगंबर अखाड़े में ही करते थे। रामनगरी में योगी का संबंध गुरु महंत अवैद्यनाथ के निकटतम पूर्व सांसद व रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. राम विलास दास वेदांती से भी है। हालांकि आज परमहंस रामचंद्र दास नहीं हैं लेकिन अखाड़े के महंत सुरेश दास के साथ योगी का आत्मीय अटूट संबंध बना हुआ है।
लगभग एक दशक पूर्व तक मंदिर आंदोलन के चरमोत्कर्ष के दौरान उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ व योगी आदित्यनाथ का अयोध्या धार्मिक व आंदोलनात्मक कार्यक्रमों के मद्देनजर आवागमन अधिक रहा लेकिन गुरु के शरीरांत के साथ ही मंदिर आंदोलन में आई शिथिलता से योगी का अयोध्या दौरा कुछेक मौकों पर छोड़ कम ही रहा है। फिर भी योगी अयोध्या जब भी पहुंचे तो दिगंबर अखाड़ा में ही रुके।