अयोध्या। रामपथ पर मकान और दुकान क्या ढहाए गए एक के बाद एक अवैध कब्जेदार अपना हक जताने के लिए आ धमके। कुछ दबंग भी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। ऐसी कई शिकायतें पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों को मिल रही है।
इसको लेकर पुलिस असमंजस में है कि क्या करे। वह भी कागजों की पड़ताल के लिए वह इसे संबंधित विभाग को भेज कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है। ज्यादा जोर पड़ने पर वह न्यायालय का आदेश लाने का हवाला दे रही है। वहीं आईजीआरएस पर आ रही शिकायतों का निस्तारण करने में भी समस्याएं आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार अयोध्या मुख्य मार्ग पर ज्यादातर जमीनें अयोध्या राजा, हनुमानगढ़ी, बड़ी जगह मंदिर व अन्य मंदिरों की हैं। इस पर वर्षों से व्यापार कर रहे ज्यादातर दुकानदार किराएदार ही थे। वहीं कुछ जमीनें अन्य जिले के स्टेट व मंदिरों की भी है।
इनमें कुछ के वारिसान कौन है, यह भी स्पष्ट नहीं है। इसकी फायदा जमीन की खरीद-फरोख्त करने वाले उठा रहे हैं। वह इन स्टेटों से जुड़े लोगों से एग्रीमेंट कराकर जमीन पर कब्जा करना चाह रहे हैं। इसके लिए वह हर तरह के पैंतरे आजमा रहे हैं।
इस संदर्भ में आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि विवादों को चिन्हित किया जाएगा। राजस्व विभाग से सामंजस्य बना टीम के जरिए इसकी मॉनीटिरिंग कर विवाद का निस्तारण कराया जाएगा।
फर्जी एग्रीमेंट के आधार पर बता रहे अपनी जमीन
सड़क चौड़ीकरण की चपेट में आने से टेढ़ी बाजार कैथाना स्थित अधिवक्ता योगेश श्रीवास्तव व रीतेश श्रीवास्तव के मकान का आगे का हिस्सा ध्वस्त हुआ है। उनका आरोप है कि इसके बाद से कुछ लोग गुट बनाकर आ रहे हैं। फर्जी एग्रीमेंट के आधार पर जमीन अपनी बता रहे हैं।
बताया कि 11 फरवरी को करीब 12 असलहाधारी लोग जबरन घुस गए व प्लाॅट खाली करने की धमकी दी, इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसकी शिकायत कई बार जिले के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक की गई लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
सब जगह की शिकायत, नहीं मिली राहत
मुख्य बाजार श्रृंगार हाट में चौड़ीकरण की चपेट में आने के बाद शेष बची दुकान को सहेज रहे कुछ व्यापारियों पर अब एक नई आफत आ गई है। व्यापारी राकेश गुप्त, दिलीप साहू, पुरुषोत्तम साहू, सत्यपाल सिंह, राजेश दुबे, श्याम नेत्रालय, राधेश्याम गुप्ता आदि का आरोप है कि एक मंदिर से जुड़ा व्यक्ति उनकी जमीन को अपनी बता रहा है।
जबकि उनके पास बैनामा, दाखिल खारिज तक है। इसमें कुछ भूमि नजूल की है, जिसका उनके पास पर्चा शुदा पट्टा भी है। इसकी शिकायत सभी ने मुख्यमंत्री से लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से की है लेकिन राहत नहीं मिली है।