अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि से जुड़े 80 से अधिक महाविद्यालयों के द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया बाधित हो गई है। कारण, विद्यार्थियों के अंक पत्र विवि प्रशासन नहीं जारी कर रहा है।
विवि प्रशासन ने परीक्षा शुल्क बकाया करने वाले महाविद्यालयों के प्रथम व द्वितीय वर्ष के परिणाम रोक रखे हैं। अंकपत्र न होने के कारण महाविद्यालयों में अब एडमिशन प्रक्रिया बाधित हो गई है।
खासतौर से जिन छात्रों का अंकपत्र अधूरा है, उन्हें एडमिशन के लिए विवि से लेकर महाविद्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। हालांकि विश्वविद्यालय की ओर से कसे गए इस शिकंजे से महाविद्यालयों के करीब 40 हजार छात्रों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
अवध विवि ने एक माह पूर्व बकाया परीक्षा शुल्क को लेकर महाविद्यालयों को नोटिस जारी किया था, जिसमें दो सौ से अधिक महाविद्यालयों के बकाया परीक्षा शुल्क न जमा करने पर अंक पत्र रोके जाने की हिदायत दी गई थी।
विवि से संबद्ध 623 महाविद्यालयों के 5.74 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क के रूप में बकाया थे। नोटिस के बाद महाविद्यालयों में हड़कंप मच गया। एक सप्ताह के अंदर दो करोड़ से अधिक की धनराशि जमा हो गई लेकिन फिर परीक्षा शुल्क जमा होने की प्रक्रिया शिथिल पड़ती गई।
अब तक 120 से अधिक महाविद्यालय 3.5 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क जमा कर चुके हैं। अभी भी 80 से अधिक महाविद्यालयों के पास 2.25 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बकाया है।
विवि बकाया धनराशि वाले महाविद्यालयों के अंकपत्र नहीं जारी कर रहा है। इतना अवश्य कि छात्र हित को देखते हुए विवि प्रशासन ने फाइनल वर्ष के विद्यार्थियों के अंकपत्र महाविद्यालयों को भेज दिए हैं लेकिन प्रथम व द्वितीय वर्ष के अंकपत्र रोक रखे हैं।
महाविद्यालयों के सामने संकट यह है कि एससी/एसटी छात्रों के परीक्षा शुल्क भी बैंक के माध्यम से मिलते हैं। इसमें विद्यार्थी को स्वत: आकर धनराशि बैंक से निकाल कर महाविद्यालयों को देनी होती है, इससे चलते 16 वित्त पोषित कॉलेजों का हाल बेहाल है।
वह छात्रों को फोन करके बुला रहे हैं, इसके बाद भी एडमिशन प्रक्रिया में बाधा खड़ी है। बहुत से महाविद्यालयों ने इंटरनेट के अंकपत्र पर ही नए वर्ष में एडमिशन प्रक्रिया शुरू करा दी है लेकिन इसमें भी अपूर्ण रिजल्ट वाले विद्यार्थियों का एडमिशन नहीं हो पा रहा है। परेशान छात्र विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
परीक्षा शुल्क छात्र से पहले लिया जाता है। महाविद्यालयों को चाहिए कि इसको समय से जमा कर दें लेकिन महाविद्यालयों की ओर से लगातार लापरवाही की जाती रही है। कुछ महाविद्यालयों के तो चार से पांच साल तक के परीक्षा शुल्क बकाया हैं। ऐसे में विवि प्रशासन की ओर से बकाया परीक्षा शुल्क जमा करने के बाद ही अंकपत्र दिए जाने का निर्णय लिया गया है। - उमानाथ, परीक्षा नियंत्रक, अवध विवि
एससी/एसटी छात्रों का परीक्षा शुल्क बैंक के माध्यम से प्राप्त होता है। इसमें छात्रों को स्वत: उपस्थित होकर महाविद्यालय प्रशासन को धनराशि देनी होती है। इसके चलते समस्त परीक्षा शुल्क नहीं जमा हो पा रहा है। इसके लिए विवि प्रशासन को पत्र भी लिखा गया है लेकिन विवि प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा हुआ है।
अजय मोहन श्रीवास्तव, प्राचार्य, साकेत महाविद्यालय