अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के भोजपुरी भाषा साहित्य एवं संस्कृति विभाग में दीक्षांत श्रृंखला के तहत शनिवार को ‘भोजपुरी भाषा साहित्य एवं संस्कृति: भिखारी ठाकुर‘ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि भोजपुरी एक क्रिया बहुुलभाषा है, जिसकी सृजनात्मक संभावनाओं का भिखारी ठाकुर ने सर्वोत्तम स्वरूप में सृजित किया है। वे न केवल भाषा की सोई हुई क्रियाओं को, बल्कि भोजपुरी संस्कृति की क्रियाशीलता को जगाते हैं। कहा कि भिखारी ठाकुर तुलसी और राम के अनन्य भक्त थे।
उन्होंने अपने साहित्य में तुलसी के लोक मंगल को विस्तार दिया। भिखारी ठाकुर उसी की पहचान है। भोजपुरी अंचल की जो मूल समस्या सांस्कृतिक समस्या है, उस पर उनकी निगाह थी। उन्होंने स्त्री विमर्श की बात कर बेटी वियोग रचना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर आदर्श और यथार्थ के बीच पुल बनाते थे, जिस पर चलने के साथ लोकमंगल संभव किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी भाषा साहित्य विभाग के समन्वयक डॉ. सुरेंद्र मिश्र ने की। कहा कि भोजपुरी सभी की भाषा है। इसकी बोली में अपनत्व दिखता है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
इस मौके पर विश्वविद्यालय की सहायक कुल सचिव डॉ. रीमा श्रीवास्तव, बाराबंकी पीजी. कालेज की अनीता सिंह, डॉ. प्रत्याशा मिश्रा, डॉ. अंकित मिश्र, डॉ. शैलेन वर्मा, डॉ. श्रेयांश सिंह, सोनू सिंह यादव, अंकिता श्रीवास्तव, आराधना, आस्था, शिखा, अंकित कुमार आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।