साथ ही काली जी का देव स्थान भी कटकर नदी में समा गया है। गांव कई लोगों का घर कटने की कगार पर है। तेजी से बढ़ रही कटान से नदी से सटे गांवों में हलचल शुरू हो गई है। लोग घरों से परिवार व जानवरों के साथ सुरक्षित स्थानों में शरण लेने लगे हैं।
सरयू नदी के जलस्तर में लगभग सप्ताह भर से बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। वनवसा बैराज से शुक्रवार को दो लाख 79 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद 72 घंटे में नदी के जलस्तर में लगभग पौने दो मीटर से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई। इससे नदी ने कछारीय क्षेत्रों में हलचल मच गई।
नदी में तेजी से हो रही वृद्धि से कछार में बाढ़ की आशंका सताने लगी है। सोमवार को कटान तेजी से शुरू हो गई है। पूरा बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने के कारण बाढ़ पीड़ित गांव पिपरी संग्राम में कटान शुरू हो गई है।
ग्राम प्रधान तेज बहादुर निषाद ने बताया कि रविवार रात लगी कटान में गांव के सत्य नारायाण निषाद, भगौती प्रसाद निषाद, राकेश निषाद का घर नदी की धारा में समा गया। गांव में स्थित काली जी का देव स्थान भी कटकर नदी में समा गया। गांव के रामदेव, मेवालाल, शिवलाल यादव व भानू यादव का घर कटने की कगार पर है।
ग्राम प्रधान के अनुसार कटने की कगार पर लगे घरों के लोगों के सामान को ग्रामीणों के सहयोग से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। बता दें कि पिपरी गांव का 80 प्रतिशत हिस्सा पिछली बाढ़ में कट गया था। जिसमें ग्राम प्रधान का घर भी शामिल था।