विश्व हिन्दू परिषद राम मंदिर निर्माण की मुहिम को धार देने की तैयारी में जुट गई है। मंदिर निर्माण के लिए रामनगरी अयोध्या में राजस्थान के वंशी पहाड़ से पत्थरों की खेप का आगमन शुरू हो चुका है। सोमवार को रामसेवकपुरम् की कार्यशाला में पहुंचे दो ट्रक पत्थरों की खेप ने राम मंदिर निर्माण मामले को लेकर हलचल मचा दी है।
बीते साल पत्थरों की खेप आने पर हंगामा मचा था, तब सपा सरकार ने वाणिज्य कर विभाग को पत्थर लाने की अनुमति देने से मना कर दिया था। मगर अब विभाग से फार्म मिलने के बाद पत्थरों की आपूर्ति पुन: शुरू की गई है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही रामनगरी में पत्थरों की खेप का आगमन भी शुरू हो चुका है, तो वहीं विश्व हिंदू परिषद भी इसको लेकर उत्साहित नजर आ रहा है। श्री रामजन्मभूमि न्यास की ओर से बाबरी मस्जिद/रामजन्मभूमि विवाद कोर्ट में होने के बावजूद राम मंदिर निर्माण की कवायद 1990 से चल रही है।
इसके लिए पत्थरों को राजस्थान के वंशी पहाड़ से लाया जाता रहा है। दो ट्रकों में कुल 130 टन पत्थर सोमवार की सुबह लगभग 6.15 बजे अयोध्या लाया गया। अहमदाबाद-आगरा ट्रांसपोर्ट से ट्रकों के माध्यम से ये पत्थर अयोध्या पहुंचाये गए हैं।
कारसेवकपुरम् अयोध्या की कार्यशाला में मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशी का काम डेढ़ दशक से चल रहा है। सितंबर 1990 से ही रामनगरी में पत्थर आते रहे हैं लेकिन अखिलेश सरकार ने विधिक कार्यवाही पूर्ण करने के बाद भी फार्र्म 32 पर रोक लगा दी थी जिससे पत्थरों का आगमन रुक गया था।
प्रदेश में अब भाजपा की सरकार बनते ही पुन: पत्थरों की आपूर्ति होनी शुरू हो गई है। पिछले वर्ष सितंबर में सपा सरकार में भी पत्थरों की खेप अयोध्या पहुंची थी जिसका शिलापूजन किया गया था। मगर मामला तूल पकड़ा तो सरकार ने पत्थरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी।
केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद अयोध्या के साधु संतों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही मंदिर बनेगा। इसी के साथ ही न्यास कार्यशाला में पत्थर तरास रहे कारीगरों का हाथ तेज हो रहा है और परिसर ठक-ठक की आवाज से गूंज रहा है।