अयोध्या। वास्तु की दृष्टि से राममंदिर का परकोटा चौरस होना चाहिए। ऐसे में तीन मंदिर परकोटे की राह में आड़े आ रहे हैं। जिसमें से दो मंदिरों का श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने बैनामा करा लिया है, तीसरे के लिए बात चल रही है। पांच एकड़ में दक्षिण भारतीय शैली में रामकथा थीम आधारित परकोटे का निर्माण होना है।
राममंदिर निर्माण के लिए नींव भराई का काम चल रहा है। राममंदिर की नींव 44 लेयर में भरी जानी है। एक सप्ताह में कई बार हुई बारिश के चलते नींव भराई का काम प्रभावित हुआ है। अभी तक मंदिर के नींव की महज तीन लेयर ही भरी जा सकी है। जब तक नींव का काम प्रभावित है तब तक ट्रस्ट ने अन्य प्रकल्पों के निर्माण को लेकर कवायद तेज कर दी है।
इसी के तहत पांच एकड़ में बनने वाले राममंदिर के परकोटे की राह में आड़े आ रहे मंदिरों को ट्रस्ट परिसर का हिस्सा बनाने में जुटा है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि पांच एकड़ से ज्यादा में राम मंदिर की सुरक्षा के लिए परकोटे का निर्माण किया जाएगा। परकोटा दक्षिण शैली में भव्यता का पर्याय होगा।
उसके लिए परिसर से सटे हुए तीन मंदिर की जगह वास्तु के आधार पर जरूरत थी। जिसमें दो मंदिरों का बैनामा हो चुका है, तीसरे मंदिर से बात चल रही है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जन्मभूमि परिसर के विस्तार का लक्ष्य 108 एकड़ भूमि का रखा है। लॉकडाउन के दौरान ट्रस्ट ने दो मंदिरों फकीरे राम मंदिर, कौशल्या भवन मंदिर को मुआवजा देकर अपने नाम बैनामा करवाया है।
इसके लिए ट्रस्ट ने कौशल्या भवन मंदिर को चार करोड़ रुपये व मंदिर निर्माण के लिए 12 बिस्वा जमीन भी दी है। कौशल्या भवन का बैनामा अलग-अलग कराया गया है। कौशल्या भवन मंदिर पैत्रक बंटवारे में दो भाइयों यशोदानंदन त्रिपाठी, कौशल किशोर त्रिपाठी के हिस्से में थी। जिन्होंने 2-2 करोड़ मुआवजा लेकर ट्रस्ट के नाम बैनामा कर दिया।
इससे पूर्व मंदिर से लगा हुआ फकीरे राम मंदिर को भी ट्रस्ट ने तीन करोड़ 70 लाख रुपये में अपने नाम बैनामा करवाया था। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम कोट मोहल्ले में दो आवासीय प्लाट भी अपने नाम खरीदा है। पहला प्लाट सीताराम दास से 154 वर्गमीटर का बैनामा करवाया है। साथ ही दूसरा बैनामा पूनम से करवाया है। इस भूमि का क्षेत्रफल 253 वर्गमीटर है।
ट्रस्ट जो भी मंदिर का बैनामा करवा रहा है। उसके लिए वह मुआवजा के रकम के साथ-साथ मंदिर स्वामी को मंदिर निर्माण के लिए भूमि भी प्रदान कर रहा है। 108 एकड़ के राम जन्मभूमि परिसर में पांच गेट प्रस्तावित हैं। डॉ. मिश्र ने बताया कि परिसर का विस्तार राम भक्त श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए प्रस्तावित है।
यही नहीं अभी राम मंदिर के लिए राम जन्मभूमि परिसर का मुख्य गेट का निर्धारण नहीं हो सका है। इसके लिए प्रदेश सरकार पहले अपनी सड़कों का सीमांकन तय करे। उसके बाद ही परिसर का मुख्य गेट निर्धारित होगा। राममंदिर तक जाने वाली सड़कों का अभी चौड़ीकरण प्रस्तावित है।