रामनगरी में सरयू किनारे राम की पैड़ी के ड्रेनेज के लिए खोदी गईं सड़कें कांवड़ यात्रा और सावन मेला में खतरनाक साबित हो सकती है। प्रशासन ने इसे लेकर चिंता जताई है, लेकिन 20 जुलाई के पहले काम पूरा होना असंभव दिख रहा है।
ऐसे में इसी रास्ते से सरयू स्नान और मंदिरों में दर्शन-पूजन को आने-जाने वाले लाखों भक्तों की सुरक्षा बेहद चुनौतीपूर्ण होगी। बैरीकेडिंग के साथ वैकल्पिक रास्तों की तैयारी नहीं हुई तो खोदी गईं सड़कें और मलवा हादसे का सबब बन सकते हैं।
रामनगरी की स्थिति यह है कि बारिश होते ही सड़क पर जलभराव श्रद्धालुओं की सांसत बन जाता है। नाले-नालियां चोक हो जाते हैं। मुख्य सड़क नहर बन जाती है। गंदगी मंदिरों की चौखट तक चढ़ जाती है। लगभग वर्ष भर से नगर क्षेत्र में सीवर विस्तार कार्य चल रहा है।
इसके लिए पहले मुख्य सड़क उखाड़ी गई, जिसे रामनवमी मेला से पहले दुरुस्त तो किया गया, मगर बाकी मंदिरों के रास्तों में कई जगह बनी सड़कें आज भी उखड़ीं पड़ी हैं। इसी दौैरान राम की पैड़ी के विकास को लेकर ड्रेनेज निर्माण का काम शुरू होने से अयोध्या में प्रवेश की मुख्य सड़क ही खोद दी गई हैं।
इसका मलवा सड़क पर पड़ा है, तमाम लोग मलवे से होकर आ-जा रहे हैं। कई लोग फिसल कर चोटहिल भी हो चुके हैं। यह स्थिति तब है जब 20 जुलाई से कांवड़ियों की भीड़ शुरू हो जाएगी और पखवारे भर बाद सावन मेला का रेला शुरू होगा।
हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास ने कहा कि कुछ दिनों पूर्व ही सरयू तट स्थित राम की पैड़ी के विकास की योजना पर कार्य जोरों पर चल रहा है। पैड़ी के जलनिकासी को ड्रेनेज सिस्टम के लिए नगर के मुख्य प्रवेश मार्ग पर गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं।
यह भक्तों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसकी बैरीकेडिंग तक नहीं की गई है। आंजनेय सेवा समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास कहते हैं कि रोजाना सरयू आरती में अभी से आना-जाना दुष्कर है, मेला में क्या हाल होगा?
कहा कि राम की पैड़ी की बाउंड्री तोड़कर नगर में प्रवेश का वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है। लेकिन बारिश के मौसम में इस मार्ग से आना-जाना खतरे से खाली नहीं रह गया है।