अयोध्या। सालों बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर कोई संशय नहीं है। इस बार एक ही दिन त्योहार मनेगा। सरयू में स्नान को लेकर लोगों में उत्साह है। भक्तों की भीड़ के मद्देनजर प्रशासन भी तैयारी में जुटा है। बृहस्पतिवार को पड़ने वाले संक्रांति को अत्यंत शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि 14 जनवरी को सूर्य दिन में 2:37 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। सूर्योदय करीब 6:43 बजे और सूर्यास्त 5:17 पर होगा। संक्रांति का पुण्यकाल करीब नौ घंटे से ज्यादा का रहेगा।
उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति सूर्योपासना का महापर्व है। मकर से मिथुन तक की छह राशियों में छह महीने तक सूर्य उत्तरायण रहते हैं व कर्क से धनु तक की छह राशियों में छह महीने तक सूर्य दक्षिणायन रहते हैं।
कर्क से मकर की ओर सूर्य का जाना दक्षिणायन तथा मकर से कर्क की ओर जाना उत्तरायण कहलाता है। सनातन धर्म के अनुसार उत्तरायण के छह महीनों को देवताओं का एक दिन और दक्षिणायन के छह महीनों को देवताओं की एक रात्रि मानी जाती है।
पंडित कौशल्यानंदन के अनुसार मकर संक्रांति भगवान सूर्य का प्रिय पर्व है। सूर्य की साधना से त्रिदेवों की साधना का फल प्राप्त होता है। सूर्योपासना से समस्त ग्रहों का कुप्रभाव समाप्त होने लगता है।
पंडित शरद ने बताया कि इस दिन सूर्य का मंत्र. ऊं घृणि सूर्याय नम: का जप करना चाहिए। इस दिन स्नान कर कलश या तांबे के लोटे में पवित्र जल भरकर उसमें चंदन, अक्षत और लाल फूल छोड़कर दोनों हाथों को ऊंचा उठाकर पूर्वाभिमुख होकर भगवान सूर्य को जलार्पण करना चाहिए।
इस दिन सूर्य से संबंधित स्तोत्र, कवच, सहस्त्र नाम, द्वादश नाम, सूर्य चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए। मकर संक्रांति पर बन रहे पंचग्रही योग से महंगाई पर नियंत्रण होगा।
इस बार सूर्य के राशि बदलते ही मकर राशि में सूर्य के साथ चंद्रमा, बुध, गुरू और शनि होने से पंचग्रही योग बनेगा। ग्रहों की यह युति बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने का ज्योतिषीय संकेत दे रही है। महंगाई कम होने की संभावना है, अन्य देशों से भारत के संबंध मजबूत होंगे। देश में अनाज भंडारण भी बढ़ेगा।