रविवार को पेट्रोल टंकी पर पेट्रोल डलवाने के लिए लगी लोगों की भीड़।
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नोटबंदी से एक तरफ जहां बाजार में मंदी छाई है, वहीं उसके उलट नौ नवंबर से पेट्रोल पंप मालिकों के लिए बहारों के दिन आ गए। कहीं पर पांच दिन तो कहीं पर एक सप्ताह तक 40 से 50 फीसदी तक सामान्य दिनों के सापेक्ष अतिरिक्त बिक्री हुई।
दरअसल उस दौरान 500 व 1000 रुपये चलाने के लिए लोग पेट्रोल-डीजल का स्टॉक करने से भी नहीं चूके । पेट्रोल-डीजल की बिक्री बढ़ने से पेट्रोल पंप मालिकों की चांदी हो गई। पेट्रोल पंपों की कमाई में भी इजाफा हुआ है।
जिले में विभिन्न कंपनियों के 72 पेट्रोल पंप हैं। इसमें इंडियन ऑयल कार्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत कंपनी के है। अमूमन एक पेट्रोल पंप पर एक माह में औसत एक लाख डीजल और 50 हजार लीटर पेट्रोल की बिक्री होती है।
लेकिन यह आंकड़ा उन प्रमुख स्थानों पर स्थित टंकियों का है जहां बिक्री ज्यादा होती है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थित टंकियों पर इसके सापेक्ष कम बिक्री रहती है। फैजाबाद, अयोध्या, बीकापुर, गोसाईगंज, मिल्कीपुर के साथ ही लखनऊ-गोरखपुर राजमार्ग पर फैजाबाद जिले में स्थित पेट्रोल टंकियों पर ज्यादा बिक्री होती है। जबकि सदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित टंकियों में बिक्री यहां के मुकाबले काफी कम होती है।