फैजाबाद डाकघर में पुराने नोट बदलने के लिए लगी लोगों की कतार(फाइल)।
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नोटबंदी के बाद डाक विभाग में जमा हो रहे पांच सौ व एक हजार रुपये के नोटों में जाली नोट भी निकल रहे हैं। प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय में रकम जमा करते वक्त ऐसे नोट स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं जिसकी भरपाई डाक कर्मियों को अपने जेब से करनी पड़ रही है।
हालांकि कोई भी कर्मी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। मुख्य डाकघर, अयोध्या व चौक की एक-एक शाखा को छोड़ ज्यादातर उप डाकघरों में काउंटिंग कम फेक नोट डिटेक्टिंग मशीन नहीं लगी है।
ऐसे मामले सामने आने पर प्रवर डाक अधीक्षक ने सर्कुलर जारी कर डाककर्मियों से कहा है कि नकली नोट मिलने पर उसे अपने पास से न बदलें, पुलिस को इसकी सूचना दें। फैजाबाद मंडल में दो प्रधान डाकघर सहित 88 उप डाकघर हैं।
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद किए जाने की घोषणा के बाद डाकघरों पर नोट एक्सचेंज करने व जमा करने वालों की कतार लग गई। ग्राहकों के अधिक दबाव के कारण जमा हो रहे नोटों का सत्यापन उतनी सूक्ष्मता से डाककर्मी नहीं कर पा रहे हैं।
इसका नतीजा रहा कि सरसरी तौर पर जमा हो रहे नोटों के असली/नकली होने में डाककर्मी गच्चा खा जा रहे हैं। नौ नवंबर से ही डाककर्मियों की जेब हर शाम को ढीली होनी शुरू हो गई। उप डाकघरों में जमा हो रहे नोटों को शाम को प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय में जमा करने जब संबंधित डाकघर के कर्मचारी पहुंचते है तो पता चलता है कि इसमें पांच सौ और एक हजार के कई जाली नोट हैं। नौ नवंबर से ही ज्यादातर कर्मियों की यही पीड़ा है कि उन्हें अपने पास से रुपये जमा करने पड़ रहे हैं।
फेक करेंसी की सूचना मिली थी। डाककर्मी भी परेशान हैं। करेंसी चेक करने वाली मशीन खरीदने को उच्चाधिकारियों को पत्र भेज साढ़े आठ लाख रुपये की मांग की है। वैसे नकली नोट मिलने पर डाककर्मियों को पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
- रणवीर सिंह तोमर, प्रवर डाक अधीक्षक