शहीद कारसेवकों की आत्मा की शांति श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से ही होगी। मंदिर निर्माण से पूर्व देश में सामाजिक विषमता को दूर करने के लिये सभी को एकसूत्र में बांधने के लिये संत-धर्माचार्यों को मठ-मंदिरों से निकलना होगा, तभी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की सार्थकता सिद्ध होगी।
यह बातें केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य व श्रीमणिराम दास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री ने बुधवार को एक श्रद्धांजलि समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। यह समारोह दिगंबर अखाड़े में शहीद कारसेवकों की स्मृति में बने स्मारक पर हुआ। समें 30 अक्तूबर व दो नवंबर 1990 के दौरान शहीद हुए कारसेवकों को श्रद्धांजलि दी गई।
संत-धर्माचार्यों, विहिप व भाजपा के लोगों ने यहां पूजन-अर्चन कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने भी कहा कि 30 अक्तूबर व दो नवंबर 1990 को मारे गए कारसेवकों की क्षतिपूर्ति भव्य राम मंदिर निर्माण से ही हो सकती है।
स्व. अशोक सिंहल व परमहंस रामचंद्र दास की इच्छा राम मंदिर की थी। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इमाम व जगद्गुरुओं को बैठाकर मंदिर विवाद का हल कराने का प्रयास कर सकते हैं। सरकार चाहे तो दोनों सदनों का सत्र बुलाकर प्रस्ताव भी पारित करा सकती है।
कहा कि, कारसेवकों को मारने वाले आज भी प्रदेश की सत्ता का आनंद उठा रहे हैं और गर्व से कह रहे हैं कि अयोध्या में मस्जिद बचाने के लिये और कारसेवकों को गोलियों से मारना पड़ता वह पीछे नही हटते। रंग महल मंदिर के महंत रामशरण दास ने कहा कारसेवकों का बलिदान व्यर्थ नही जाएगा।
मंदिर के साथ ही भारत माता की अखंडता भी सुनिश्चित होगी। पुष्पांजलि के पूर्व आचार्य दुर्गा प्रसाद गौतम ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शांति पाठ तथा संकल्प कराया। संचालन विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने किया।
पुष्पांजलि कार्यक्रम में सांसद लल्लू सिंह, महंत नारायणाचारी, अखिल भारतीय दिगंबर अनि अखाड़ा के मंत्री महंत वैष्णव दास, महंत सियापिया शरण, बड़ा फाटक के उत्तराधिकारी महंत संजीव दास, बासमुकंद शरण, महंत डा. राघवेंद्र दास वेदांती आदि ने शहीद स्मृतिका पर पुष्पांजलि देकर शहीद कारसेवकों को स्मरण करते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।