अयोध्या। सरयू तट स्थित राममंदिर आंदोलन के श्लाका पुरुष रामचंद्र दास परमहंस की समाधि स्थल का सुंदरीकरण होगा। इसे श्रद्धा के साथ-साथ पर्यटन का भी केंद्र बनाया जाएगा। सुंदरीकरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। इस पर शीघ्र ही काम शुरू होने की उम्मीद है।
2003 में महंत परमहंस दास के निधन के बाद सरयू तट पर उनकी समाधि बनाई गई थी। जो वर्षों उपेक्षा की शिकार रही। इसे लेकर संत अक्सर आवाज भी उठाते रहे। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद समाधि स्थल के दिन बहुरने की उम्मीद जगी।
मुख्यमंत्री योगी स्वयं कई बार समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने जा चुके हैं। परमहंस के शिष्यों में में से एक आचार्य नारायण मिश्र ने राम भक्तों के सहयोग से यहां एक भवन भी बनवाया है। अब इस स्थल को भव्य रूप देने की तैयारी है।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि समाधि स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। रामचंद्र दास परमहंस ने राममंदिर आंदोलन को नई दिशा दी थी। जिस दिगंबर अखाड़ा के वे महंत थे, राममंदिर आंदोलन की पहली बैठक भी वहीं ही हुई थी।
इसी बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए समिति का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष महंत अवैद्यनाथ बनाए गए थे। 1989 में महंत परमहंस दास को रामजन्मभूमि न्यास का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद राममंदिर आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
1949 में विवाद शुरू होने से लेकर 1992 में ढांचा विध्वंस तक महंत रामचंद्र दास की मुख्य भूमिका रही। दिगंबर अखाड़ा के वर्तमान महंत सुरेश दास कहते हैं गुरुदेव 1934 में ही राममंदिर आंदोलन से जुड़ गए थे। उनके दृढ़ संकल्प का ही नतीजा था कि नौ नवंबर 1989 को राममंदिर का पहला शिलान्यास हुआ।
परमहंस का इतना प्रभाव था कि उनकी एक आवाज पर दिल्ली सरकार हिल उठती थी। परमहंस की समाधि स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना स्वागत योग्य है।
अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी कहते हैं कि राममंदिर निर्माण में महंत परमहंस दास का अविस्मरणीय योगदान है। ऐसे महापुरुषों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।
अयोध्या-सरयू तट स्थित रामचंद्र दास परमहंस की समाधिस्थल- फोटो : FAIZABAD
महंत सुरेश दास- फोटो : FAIZABAD