जिले में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। अब तक सरकारी जांच में एचआईवी संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या साढ़े आठ सौ है। जबकि तमाम निजी पैथोलॉजी के आंकड़े जोड़ दें तो एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या डेढ़ हजार के पार पहुंच गई है।
एचआईवी का संक्रमण अधिकतर उन लोगों में पाया गया तो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व अन्य शहरों में कमाने गए थे। इनमें से तमाम लोगों से उनकी जीवन संगिनी को भी एचआईवी संक्रमण हो गया है।
एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को शुरू में इसकी जानकारी नहीं हो पाती है। मगर इसका वायरस धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर कर देता है। इसके बाद पीड़ित को जो भी बीमारी होती है वह ठीक नहीं होती।
जिले में अधिकतर एचआईवी संक्रमण उन लोगों में पाया गया जो कमाई के लिए महानगरों में रहने जाते हैं। जिले में मवई, रुदौली व मया ब्लॉक के कई गांव हाई रिस्क ग्रुप एरिया के रूप में चिह्नित किए गए हैं।
इन क्षेत्रों में 2014 में नाको की ओर से शिविर लगाकर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया गया था, जिसमें से जिला अस्पताल को काउंसलर रमेश पांडेय और स्वाति ने प्रतिभाग किया था।
इसके अलावा नाको की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिले में स्वैच्छिक परामर्श एवं परीक्षण केंद्र की स्थापना की गई है।
वर्ष 2004 से जिले में एचआईवी पीड़ितों की काउंसलिंग की जाती है और इसके बाद यदि वह सहमत होता है तो जांच कराता है। हालांकि बदलते दौर के साथ गर्भवती महिलाओं और ऑपरेशन कराने के लिए आने वाले हर मरीज की एचआईवी जांच अनिवार्य कर दी गई है।