आग उगल रहे सूरज की तपिश से हर कोई बेहाल नजर आया। मंगलवार को इस साल का सर्वाधिक तापमान 47 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। ऐसे हालात में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में मासूम भीषण गर्मी में बेहाल रहे। कहीं पेड़ के नीचे कक्षाएं चलती दिखीं, तो कहीं कमरे में पसीने से तरबतर बगैर पंखे के बच्चे पढ़ते दिखे।
जबकि सीबीएसई और आईसीसीएसई बोर्ड के स्कूलों ने मासूमों को राहत देते हुए स्कूल बंद कर रखे हैं। बीएसए ने कहा कि कक्षा एक से 8 तक पढ़ रहे सवा लाख बच्चों को अभी छुट्टी के लिए ऊपर से कोई आदेश नहीं मिला है। 20 मई से ग्रीष्मावकाश घोषित है।
गर्मी ने मंगलवार को इस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। चिलचिलाती धूप में पूरे दिन घर से बाहर निकलना मुश्किल रहा। दोपहर में तो शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बावजूद इसके परिषद के स्कूल खुले रहे और गर्मी से बेहाल बच्चे कक्षाओं से लकर सड़कों पर आते-जाते दिखे।
आग उगलता सूरज और तपती धरती फिर भी मजबूरी में मासूमों को स्कूल जाना पड़ रहा है। पारा 47 डिग्री को छू गया, जो सामान्य से 8 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 डिग्री अधिक रहा। जिले में तीन बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित होते हैं।
सीबीएसई और आईसीएससी बोर्ड के स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके है जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल अब भी खुले हैं। अन्य दो बोर्डों में छात्र/छात्राओं की तादात काफी कम है जबकि बेसिक स्कूलों के छात्र/छात्राओं की तादात जिले में करीब सवा लाख है।
परिषदीय स्कूलों के खुले होने से मासूमों को राहत नहीं मिल पा रही है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों का हाल यह है कि वह किसी तरह से स्कूल पहुंच रहे हैं। गर्मी से बच्चों को हो रही परेशानी पर कार्यालयों में बैठे बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को फिक्र नहीं है। शहर के उदया पब्लिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, जिंगल बेल एकेडमी आदि स्कूल बंद हो गए हैं जो कि सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं।
आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त एचसीजे एकेडमी भी बंद हो गया है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त शहर का प्रतिष्ठित कन्या विद्यालय कनौसा अभी खुला हुआ है। यहां मंगलवार को मासूम बालिकाएं पेड़ के नीचे पढ़तीं मिलीं। बच्चों का कहना था कि गर्मी बहुत लग रही है, लेकिन स्कूल तो 20 तक आना है।