इसके लिए जिले भर के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने नई वैक्सीन की गुणवत्ता से दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके देव को जिम्मेदारी सौंपी है।
पोलियो के तीन प्रकार के वायरस होते हैं। इनमें से पी1 टाइप के वायरस को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है। पोलियो वायरस से निपटने के लिए बच्चों को जन्म के समय और जितनी बार अन्य टीके लगते हैं उतनी बार पोलियो वैक्सीन पिलाई जाती है।
इसके अलावा पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए हर दूसरे माह बूथ लगा कर बच्चों को पोलियो वैक्सीन पिलाई जाती है। तीनों प्रकार के वायरस के लिए नवजात शिशुओं को ट्राईवैलेट और कभी कभार मोनो वैलेंट वैक्सीन पिलाई जाती थी।
पोलियो वायरस को पूरी तरह से खात्मे के लिए नई वैक्सीन का इजाद किया गया है। यह वैक्सीन बच्चों को 14 सप्ताह यानी साढ़े तीन माह पर लगाया जाएगा। शासन के निर्देश पर यूनीसेफ, डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को वैक्सीन के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।