उपभोक्ताओं का कहना है कि गर्मी, सर्दी हो या फिर बरसात बिजली आपूर्ति तो सही ढंग से मिलती नहीं। ऊपर से महंगाई के इस दौर में जनता पर बिजली दरों में बढ़ोतरी कर नया बोझ लाद दिया गया है। किसानों का कहना है मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों को लेकर राहत की बात करने वाली सरकारों ने यह कैसा सितम दिया है।
प्रदेश की जनता पर गुरुवार को बिजली दरों में 12 फीसदी बढ़ोत्तरी की घोषणा से जिले के उपभोक्ताओं में शासन के फैसले को लेकर रोष है। पेशे से किसान पारसनाथ वर्मा, जयराम सिंह, चंदूभाई पटेल व अखंड प्रताप सिंह कहते हैं कि प्रदेश का किसान पर चौतरफा संकट से घिरा है। ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश से किसान पहले ही बर्बाद हो चुका है।
किसानों का चीनी मिलों पर गन्ना मूल्य का करोड़ों रुपया बकाया है। इन सबके बावजूद शासन स्तर पर किसानों की आर्थिक रूप से टूट चुकी कमर को बेहतर बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। अब बिजली दरों में बढ़ोतरी कर सरकार ने किसानों के साथ क्रूर व्यवहार कर रही है।
कहा कि किसान आने वाले चुनाव में इसका बदला जरूर लेंगे। वहीं शहर क्षेत्र में रामभद्र दास कहते हैं कि शासन व पावर कॉर्पोरेशन का यह फैसला पूरी तरह जनता पर जबरिया आर्थिक बोझ लादने जैसा है। रामसूरत कहते हैं कि आम जनता महंगाई से परेशान है।
ऐसे समय सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय बिजली दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर आम जनता को रुलाने का काम किया है। आलोक मिश्र व श्रीराम सरकार कहते हैं कि शासन व पावर कॉर्पोरेशन का यह फैसला पूरी तरह जन विरोधी है। उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति सही ढंग से नहीं मिल पा रही।
बेतहाशा कटौती से आम जन परेशान हैं। सरकार व कॉर्पोरेशन बिजली आपूर्ति की व्यवस्था में बेहतरी की दिशा में कदम न उठाकर बिजली दरों में बढ़ोतरी कर आम जनमानस की आर्थिक परेशानियों को और बढ़ाने का कार्य किया है।