बंदउ गुरुपद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरि/ महा मोह तम पुंज जासु कृपा रविकर निकर। रामनगरी में रामचरितमानस में वर्णित इस पंक्ति सहित संपूर्ण भारतीय चेतना में प्रतिपादित गुरु पद की महिमा-महत्ता गुरुपूर्णिमा के अवसर पर पूरी तरह शिरोधार्य हुई। भोर से ही सरयू में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्तों का तांता लगा रहा। शिष्यों ने स्नान-दान के बाद मठ-मंदिरों में जाकर गुरु चरणों में नतमस्तक हो आस्था अर्पित की।
पूरे दिन गुरुधामों में उमड़े शिष्यों के भारी सैलाब से गुरु की महिमा-महत्ता प्रस्फुटित होती रही। अयोध्या में भोर से ही गुरुचरणों का पूजन-अर्चन करने के लिए भक्त कतारबद्ध रहे। गुरुपूर्णिमा पर्व की पूर्व संध्या से ही नगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ गुरु पूजन के निमित्त गुरु स्थानों पर जुटने लगी थी।
भोर से ही सभी मंदिरों में शिष्यों ने गुरु की पूजा-आरती की और उनके प्रति समर्पण व्यक्त किया। सर्वाधिक भीड़ श्रीमणिराम दास जी की छावनी में देखी गई। शिष्य लंबी कतार में लगाकर श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष व श्रीमणिराम दास की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास के पूजन के लिए कतारबद्ध रहे।
दशरथ महल बड़ा स्थान, उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली, श्रीराम बल्लभाकुंज, रंगमहल, श्रीतुलसी दास जी की छावनी, रामायणम् आश्रम, श्रीमंत्रार्थ मंडपम्, लवकुश मंदिर, सियाराम किला, तिवारी मंदिर नयाघाट, सद्गुरु सदन, विअहुति भवन, हनुमत सदन, हनुमान बाग, कोशलेश सदन, अशर्फी भवन, हरि गोपाल धाम, महर्षि महेश योगी आश्रम आदि प्रमुख पीठों पर गुरु पूजन के लिए शिष्यों की भारी गहमा-गहमी रही।
प्रसिद्ध दिगंबर अखाड़ा में भी शिष्यों की भीड़ गुरुपूजन के लिए उमड़ी। भक्तों ने महंत सुरेश दास की पूजा अर्चना की। शिष्यों की इस भीड़ में संत-धर्माचार्यों से लेकर न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी, कृषक, व्यवसायी, नौकरी पेशा, राजनीतिज्ञ, शिक्षक, अधिवक्ता आदि विभिन्न वर्ग के लोग शामिल रहे।