उफनाई सरयू लाल निशान छूने को बेताब
फैजाबाद। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश व नेपाल से छोड़े पानी से यहां सरयू उफान पर है। वह लाल निशान छूने को बेताब है। वहीं नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कछार वाले क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है।
यहां बाढ़ से प्रभावित करीब डेढ़ दर्जन गांवों के ग्रामीण अपने पशुओं समेत अनाज व जरुरी सामानों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुध लेने कोई अफसर नहीं पहुंचा है।
जबकि गंदे पानी के सेवन से कई लोगों की तबियत बिगड़ रही है। वहीं एडीएम वित्त एवं राजस्व एमपी दूबे का कहना है कि जिले में बाढ़ जैसी अभी कोई स्थिति नहीं है, फिर भी संबंधित विभागों और कर्मियों को अलर्ट किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग की टीमों को मौके पर भेजा जा रहा है। बनबसा व गिरिजा बैराजों से छोड़े गये करीब एक लाख क्युसेक पानी से तराई क्षेत्रों की नदियां उफनायी हुई है।
केन्द्रीय जल आयोग के अयोध्या नया घाट कार्यालय के मुताबिक, शनिवार सुबह से पांच सेमी. प्रति घंटे सरयू के जलस्तर में इजाफा हुआ। जबकि दोपहर दो बजे बाद से कमी आयी और प्रति घंटे तीन सेमी. बढ़ोत्तरी हो रही है।
सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से महज 50 सेमी. नीचे है। शाम चार बजे सरयू का जलस्तर 92. 240 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस नदी का लाल निशान 92.730 मीटर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान में तेजी आयी है।
बताते हैं कि रौनाही बंधे के निकट बसे गांवों सल्लाह पुरवा व सरायनासिर इलाके का करीब पांच बीघा भूमि कटकर नदी में समा गई। इससे ग्रामीणों में बाढ़ का खौफ बना हुआ है। यह बंधा 14.550 किलोमीटर लंबा है।
लेकिन पांच सौ मीटर हिस्सा बदहाली के चलते संवेदनशील है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता प्रदीप सिंह पटेल ने बताया कि इस बंधे पर नजर रखी जा रही है।
वहीं दूसरे 13 किलोमीटर लंबे बिल्वहरिघाट बंधे का एक किलोमीटर हिस्सा अतिसंवेदनशील है। यहां के सरायरासी व राय हलवारा गांवों के ग्रामीणों का ऊंचे स्थलों की ओर पलायन जारी है।
दो बाढ़ पीड़ितों को मिली राहत चेक
शुजागंज प्रतिनिधि के अनुसार, रुदौली क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित कैथी गांव के दो बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से राहत चेक दी गई। बाढ़ में इन दोनाें के घर नदी की कटान में समा गए थे। पीड़ितों को 4100-4100 रुपये की सहायता चेक तहसीलदार ने दी है।
बताया जा रहा है कि तीन दिन पूर्व कैथी गांव के रामसागर व लल्लू का घर कट गया था। प्रशासन पहले छप्पर बताकर घर कटने की बात से इंकार करता रहा। तहसीलदार ज्ञानचंद्र गुप्त ने कहा कि बाढ़ के सहायता नियमों के तहत मदद की गयी है।