पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के साथ चल रही पछुआ हवा की वजह से हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। गलन भरी बर्फीली हवा से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। पारा गिर कर 1.5 डिग्री तक आ गया है, जो सामान्य से छह डिग्री कम है।
आलम यह है कि रात में फसलों पर गिर रही ओस की बूंदे बर्फ में तब्दील हो जा रही है जो लोगों के लिए कौतूहल तो फसलों के लिए यह खतरे का संकेत है। ठंड की वजह से आलू और टमाटर की फसलें बरबाद होने की आशंका है।
गोसाईगंज/महबूबगंज प्रतिनिधि के मुताबिक फसलों पर ओस की बूंदें रात में जम जा रही हैं। विकास खंड मया के ग्राम सभा शेरवा घाट में शुक्रवार की सुबह जो भी किसान घर से निकल कर खेतों में अपनी फसलों को देखने गया उसके मुंह से एक ही शब्द सुनने को मिला, आज बर्फ पड़ी है।
ठंड का विकराल रूप देख किसान दंग रह गए। फसलों पर जमी ओस की बूंदें कड़ाके की ठंड का संकेत दे रही हैं। खेतों में फसलों पर जगह-जगह सफेद चादर सी बिछ गई थी। ग्रामीणों ने जब बर्फ को हाथ से मसला तो पानी बन गई।
शेरवा घाट निवासी 75 वर्षीय केशव तिवारी, गजराज माझी, जसराज सिंह आदि ने बताया कि हमने पूरे जीवनकाल में गांव में इस तरह फसलों के पत्तों पर सफेद बर्फ कभी नहीं देखी थी। ठंड की यही स्थिति जिले के तारुन, बीकापुर, इनायतनगर, मिल्कीपुर, कुमारगंज सहित अन्य क्षेत्रों में भी रही।
बर्फीली हवाओं की वजह से पशुपालाक भी परेशान है। पशुपालक त्रिभुवन यादव, राम नवल यादव, विजय शंकर सिंह ने बताया कि ठंड से पशुओं को बचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।