सड़क किनारे की जमीन सस्ती, पीछे की जमीन महंगी कैसे
सवाल खड़ा होता है कि सड़क किनारे की भूमि सीधे भूस्वामी पाठक दंपती से लेने पर आठ करोड़ में मिल जाती है तो पीछे की जमीन और सस्ती होने के बजाए 10.50 करोड़ महंगी कैसे हो गई।
सवाल यह भी उठता है कि जब पाठक दंपती से एक रजिस्ट्री कराई गई तो दूसरी रजिस्ट्री के लिए दलालों को बीच में क्यों डाला गया।
संघ व सरकार नाराज, अब काशी मॉडल से खरीदी जाएगी जमीन
राममंदिर के विस्तारीकरण के लिए खरीदी जा रही जमीन की प्रक्रिया व उठ रहे सवालों से पीएमओ और संघ बेहद नाराज हैं। अब जमीन की खरीद के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर और कॉरिडोर के विस्तार के लिए अपनाए जा रहे काशी मॉडल को अपनाया जाएगा। इस मॉडल की तर्ज पर रजिस्ट्री से पहले प्रशासनिक एक्सपर्ट्स की एक मूल्यांकन समिति से जांच कराई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निगोसिएशन कमेटी विक्रेता से बातचीत कर जमीन की कीमत तय करेगी। काशी मॉडल में मूल्यांकन समिति में एसडीएम, सब रजिस्ट्रार, तहसीलदार-कानूनगो और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर शामिल रहते थे।