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चार हजार रुपये प्रति बीघा बढ़ गई धान की लागत

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अयोध्या। बरसात न होने से किसानों के लिए धान की फसल तैयार करना मुश्किल हो रहा है। रोपाई की गई धान की फसल में लगातार सिंचाई करने से उत्पादन लागत भी बढ़ गई है।
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धान की रोपाई पर संकट होने के चलते कुछ किसानों द्वारा धान के रकबा में भी कमी कर दी है। रोपी गई धान की फसल को बचाने के लिए किसानों को कम से कम तीन अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है।
250 रुपये प्रति घंटे किराए के डीजल इंजन से सिंचाई करने पर उन्हें कम से कम चार हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। बारिश न होने से नलकूप के पानी से किसी तरह जो किसान थोड़ी बहुत धान की रोपाई कर चुके हैं उनके लिए अब फसल बचाना मुश्किल हो रहा है।
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बार-बार हर तीसरे दिन सिंचाई करने से किसान परेशान हैं। रोपाई किए गए धान की फसल में पानी के अभाव के चलते टांड़ा रोग और दीमक लग रही हैं। खेत में दरारे पड़ रही हैं। बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग व लो-वोल्टेज से भी किसान पर्याप्त सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
बारिश न होने के चलते भूगर्भ जलस्तर घट जाने से किसानों के निजी नलकूप भी पानी कम दे रहे हैं। डीजल इंजन और पंप सेट से सिंचाई करने वाले किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
किसी तरह फसल यदि बच भी गई तो उत्पादन लागत चार हजार रुपये प्रति बीघा बढ़ जाएगी। रोपे गई धान की फसल को बचाने के लिए किसानों को कम से कम तीन सिंचाई की आवश्यकता होती है।
डीजल इंजन से एक बीघा खेत की सिंचाई करने के लिए इस समय करीब छह घंटे लग रहे हैं। किसानों को सिंचाई करने के लिए 250 रुपये प्रति घंटा की दर से डीजल इंजन किराए पर मिल रहा है।
इस तरह एक सिंचाई में किसान को करीब 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। तीन सिंचाई की बात करें तो यह खर्च 4500 रुपये तक पहुंच जाता है। वहीं बीते वर्ष यही डीजल इंजन किसानों को करीब 175 रुपये प्रति घंटे की दर से किराए पर मिल जाता था।
मौसम की मार सह रहे किसानों की उत्पादन राशि भी बढ़ रही है, ऐसे में आने वाले दिनों में चावल के दाम भी बढ़ने तय हैं। बीकापुर ब्लॉक क्षेत्र के भीखी सराय निवासी मनोकानिका तिवारी ने कहा कि उन्होंने चार बीघा धान की फसल की रोपाई की है।
उनके पास डीजल के इंजन से सिंचाई करने का साधन है। डीजल के दाम में बढ़ोतरी होने के चलते एक घंटे में करीब सवा लीटर डीजल खर्च होता है। प्रति बीघा खेत की सिंचाई करने में करीब छह घंटे लग रहे हैं।
बार-बार सिंचाई करने से दिक्कत आ रही है। यदि बरसात हुई भी तो अतिरिक्त पानी देना पड़ेगा। जिससे उत्पादन लागत चार हजार तक बढ़ जाएगी और जमा पूंजी निकालना भी मुश्किल होगा।
केराजोत तोरो माफी निवासी नंदू वर्मा ने कहा कि 10 बीघा खेत में धान की रोपाई की है। बरसात न होने से रोपाई किए गए धान की फसल को पानी देना मुश्किल हो रहा है। किसी तरह फसल तैयार हो भी गई तो उत्पादन कम होगा और लागत भी नहीं निकल पाएगी।
सूल्हे पुर निवासी कृष्ण कुमार पांडेय ने कहा कि 15 बीघा धान की रोपाई की जानी थी, लेकिन बरसात न होने से नलकूप के सहारे सिर्फ पांच बीघा धान की रोपाई की है। वह भी पर्याप्त सिंचाई न होने से सूख रही है और खेत में दरारे पड़ रही हैं।
पूरा बाजार निवासी किसान गिराऊ ने कहा कि बारिश न होने के कारण डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ रही है। लाइट का कोई भरोसा नहीं रहता। एक घंटा रहती है फिर कट जाती है। इसलिए खेत में जो पानी जाता भी है, वह सूख जाता है।
एक बीघे धान बैठाने में लागत कम से कम पांच से छह हजार रुपये आ रही है। किसान किसी तरह धान की रोपाई कर भी ले रहा है तो पानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं।
पूरा बाजार निवासी किसान सनी सिंह ने कहा कि किसी तरह दो तीन बीघा धान की रोपाई की है, शेष रोपाई करने के लिए बारिश का इंतजार कर रहा हूं। अगर बारिश होती है तो और धान की रोपाई करूंगा नहीं तो खेत खाली पड़े रहेंगे।
रानी बाजार क्षेत्र के किसान शैलेंद्र यादव ने कहा कि पानी नहीं होने से 25 बीघा धान की रोपाई नहीं हुई। जिससे परिवार चलाने के साथ-साथ पशुओं को चारा का संकट पैदा हो सकता है।
नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक रवि मौर्या का कहना है कि अभी तक बारिश न होने के कारण जल स्तर नीचे जा रहा है। इस समय धूप भी बहुत चटख हो रही है। जिसकी वजह से खेतों का पानी जल्दी सूख जा रहा। नमी कम होने के कारण सिंचाई में दोगुना समय और अधिक पानी लग रहा है।
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