इस बारे में खाद्य आयुक्त स्तर से जिलों के अभिहित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उपभोक्ता आरोप लगाते रहे हैं कि ब्रांडेड कंपनियों के खाद्य पदार्थों की जांच फूड इंस्पेक्टर नहीं कराते हैं।
ऐसी शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं औषधिक आयुक्त स्तर से उपभोक्तओं को खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच कराने की छूट दी गई। इसके लिए उपभोक्ताओं को एक हजार रुपये शुल्क जमा करना होगा।
अब ब्रांडेड और नान ब्रांडेड खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उपभोक्ता ट्रेजरी में एक हजार रुपये शुल्क जमाकर खाद्य पदार्थ की जांच करा सकते हैं।
शुल्क जमा करने के बाद उपभोक्ता खाद्य पदार्थ का नमूना सीधे लखनऊ स्थित जन विश्लेषक प्रयोगशाला में भेज कर जांच करा सकते हैं।
उपभोक्ता वहां जाने में सक्षम नहीं है तो ट्रेजरी में जमा शुक्ल की प्रति के साथ संकलित नमूने को डाक के जरिए भेज सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता को शुल्क जमा कर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता की जांच करा सकता है।
अभिहित अधिकारी वीके पांडेय ने बताया कि शुल्क जमा करने के बाद उपभोक्ता को खाद्य पदार्थ का नमूना भरे जाने की झूट मिल जाती है। शासन के आदेश के बाद उपभोक्ता अब स्वयं जांच करा सकता है।