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श्रीराम की प्रतिमा के लिए तकनीकी जांच शुरू

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अयोध्या। अयोध्या में श्रीराम की विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर मूर्ति की स्थापना के लिए अब जमीन को अंतिम रूप देने के लिए दो नए स्थलों की तकनीकी जांच शुरू हो गई है। 28 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के नोटिफिकेशन के साथ मीरापुर दोआबा में मूर्ति स्थापित करने का प्रस्ताव था, मगर तकनीकी जांच में मूर्ति स्थापना के योग्य भूमि नहीं पाई गई।
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अब मांझा बरहटा व जमथरा में सर्वे करके भूमि की तकनीकी जांच शुरू हो गई है। जहां भी भूमि की क्षमता उपयुक्त मिलेगी, वहां की भूमि का अधिग्रहण प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
रामनगरी में विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर की भगवान श्रीराम की मूर्ति को लेकर अभी तक जमीन फाइनल नहीं हो सकी है। पहले मीरापुर दोआबा में जमीन देखी गई थी। पर्यटन विभाग की ओर से इस भूमि का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया था।
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इसमें सरयू किनारे 222 लोगेा की 28.2864 हेक्टेयर भूमि ली जानी थी। इसमें 66 भवन व 5 मंदिरों के अधिग्रहण का भी प्रस्ताव था। लेकिन नोटिफिकेशन के बाद भूमि की क्षमता अनुपयुक्त मिलने से मीरापुर दोआबा में मूर्ति स्थापना को लेकर ग्रहण लग गया।
अब दो नए स्थानों जमथरा व मांझा बरहटा की भूमि के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इन दोनों जमीनों की तकनीकी जांच भी शुरू हो गई है। तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
अयोध्या में स्थापित होने वाली 251 मीटर राम की मूर्ति अयोध्या की गरिमा के अनुकूल होगी। मूर्ति के बेसमेंट के अंदर एक भव्य हाल होगा। जिसमें एक म्यूजियम स्थापित किया जाएगा। इस म्यूजियम में भगवान विष्णु के सभी अवतारों की जानकारी और अयोध्या रामजन्मभूमि का इतिहास भी दर्शाया जाएगा।
यहां मूर्ति के अलावा विश्राम घर, श्रीराम की कुटिया और रामलीला मैदान भी बनाए जाने का प्रस्ताव है। रामनगरी में स्थापित होने जा रही यह प्रतिमा स्टेचू ऑफ यूनिटी से भी ऊंची होगी, इसकी ऊंचाई 182मीटर है जबकि प्रस्तावित राममूर्ति की ऊंचाई 251 मीटर है।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि श्रीराम की मूर्ति स्थापित करने के लिए तीन स्थलों मीरापुर दोआबा, मांझा बरहटा व जमथरा का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। मीरापुर दोआबा में भूमि के अधिग्रहण का नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन यह भूमि मूर्ति के लिए अनुपयुक्त पाई गई है। अब मांझा बरहटा व जमथरा की भूमि की तकनीकि जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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