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अधूरे आवासों की जांच करने पहुंची टीम

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मवई। ग्राम पंचायत बरतरा में 2015-16 से अधूरे पड़े इंदिरा आवासों की जांच मानवाधिकार आयोग में मामला पहुंचने के बाद शुरू हुई है। शनिवार को परियोजना निदेशक कमलेश कुमार सोनी की देखरेख में टीम जब गांव पहुंची तो हड़कंप मच गया।
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ग्राम पंचायत में 2015-16 में चयनित लाभार्थी भोला, रमराजा, कुसुम आदि को पहली किश्त के रूप मे 35-35 हजार रुपये मिले थे। इसके बाद स्थानीय ब्लॉक कर्मियों की हीलाहवाली के चलते उन्हें अन्य किश्तों का पैसा नहीं मिला।
इसकी शिकायत लाभार्थी लगातार कर रहे थे। तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण कुमार ने लाभार्थियों को अपात्र ठहराकर उनसे रिकवरी करने की बात कही थी।
मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में हुई तो जिले के अधिकारियों को आयोग में तलब होना पड़ा। शनिवार को जांच करने पहुंचे जिले के अधिकारियों ने सोमवार को लाभार्थियों को अयोध्या बुलाया और आवास पूरा करने का आश्वासन देते हुए दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
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दूसरी ओर ग्रामीण फैजान ने इसी ग्राम पंचायत के प्रधान व पंचायत सचिव के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत करते हुए कहा था कि ग्राम पंचायत में फर्जी बैठक करके कागज पर मृतक लोगों के फर्जी हस्ताक्षर करके मनरेगा सहित ग्राम निधि से लाखों रुपये निकाले गए हैं।
आयोग के आदेश पर इस मामले की जांच भी डीपीआरओ अयोध्या डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा व पीडी कमलेश कुमार ने की। पीडी कमलेश कुमार सोनी ने बताया कि मौके पर जांच की गई है। अब अभिलेखों की जांच की जाएगी। उसके बाद तथ्यों के आधार पर जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी। कहा कि चार साल से अधूरे पड़े आवास जल्द ही पूरे कराए जाएंगे।
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