दो दिन हड़ताल के बाद स्टाफ नर्सें ड्यूटी पर लौट आई हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। हालांकि दो दिन के दौरान 36 मरीजों का ऑपरेशन स्थगित किया गया है, जिसमें से 11 प्रसूताएं हैं। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश फ्रंट लखनऊ के संयुक्त आह्वान पर स्टाफ नर्सें शुक्रवार को हड़ताल पर चली गई थी।
छह सूत्री मांगों को लेकर नर्सें धरना-प्रदर्शन दे रही थीं। उनका कहना है कि 54 सौ से कम ग्रेड पे किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा नर्सों का कई पद समाप्त कर दिया गया था। नाराज नर्सें हड़ताल पर गईं तो अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।
जिला अस्पताल की ऑर्थो ओटी, जनरल ओटी और महिला अस्पताल में पीपी ओटी और जनरल ओटी में ऑपरेशन पूरी तरह ठप हो गए थे। इस दौरान 36 मरीजों का ऑपरेशन स्थगित करना पड़ा। इसमें से 11 प्रसूताएं थीं, जिनका निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन किया गया।
और तो और, स्टाफ नर्सों की हड़ताल होने की वजह से मरीजाें की भर्ती पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। चिकित्सकों का कहना था कि यदि मरीजों को भर्ती कर लिया जाए तो उनको इंजेक्शन और दवाई कौन देगा। ठेके की स्टाफ नर्सों से मरीजों का किसी प्रकार से इलाज किया जा रहा था।
नतीजतन जनरल वार्ड के मरीजों को भी नीचे वार्ड में ही शिफ्ट कर दिया गया था। नर्सेज संघ के मंत्री अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व के आह्वान हड़ताल समाप्त कर दी गई है। सभी स्टाफ नर्सें ड्यूटी पर लौट आई हैं।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि अब अस्पताल में मरीजों का नियमित इलाज हो रहा है। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं।