अयोध्या। राममंदिर निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। राम जन्मभूमि परिसर में जहां 20 फीट ऊंची प्लिंथ का निर्माण कार्य चल रहा है तो वहीं पत्थरों की तराशी व नक्काशी के काम में भी तेजी आ गई है।
अयोध्या के साथ राजस्थान की तीन कार्यशालाओं में पत्थरों की तराशी व नक्काशी में कारीगर जुटे हैं। रामघाट स्थित कार्यशाला में 16 कारीगर करीब दो माह से नक्काशी के काम में जुटे हुए हैं। नक्काशी के लिए वे मशीनों का भी प्रयोग कर रहे हैं।
राममंदिर मंदिर निर्माण में कुल 17 लाख घन फीट पत्थर लगने हैं। नींव के दो चरण का काम पूरा हो चुका है। पहले चरण में 50 फीट गहरी नींव बनाई गई तो दूसरे चरण में नींव के ऊपर डेढ़ मीटर की रॉफ्ट ढाली गई।
अब तीसरे के तहत रॉफ्ट के ऊपर 20 फीट ऊंची प्लिंथ का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें करीब 30 हजार ग्रेनाइट के पत्थर लगेंगे। इसके बाद मंदिर का गर्भगृह आकार लेगा।
मंदिर तीन मंजिला होगा। तीसरी मंजिल में करीब साढ़े चार लाख घन फीट पत्थर लगेंगे। अभी तक केवल 40 हजार घन फीट पत्थर तैयार हैं। गर्भगृह में पौने दो लाख घन फीट पत्थर लगेंगे।
शेष दो मंजिला में सवा लाख-सवा लाख घन फीट पत्थरों का इस्तेमाल होना है। अगले छह माह के भीतर पत्थरों का प्रयोग शुरू हो जाएगा इसलिए पत्थरों को तैयार करने का काम भी तेज कर दिया गया है।
राजस्थान की तीन कार्यशालाओं में पत्थरों की तराशी व नक्काशी का काम चल रहा है। यह पत्थर राजस्थान से सीधे तराशकर अयोध्या लाए जाएंगे। वहीं गर्भगृह की छत के लिए रामघाट स्थित राममंदिर की कार्यशाला में पत्थरों की नक्काशी व तराशी का काम जोरों पर चल रहा है।
इस काम में कुल 16 कारीगर लगे हैं। कारीगर प्रतिदिन करीब 12 घंटे काम कर रहे हैं। ज्यादातर नक्काशी का काम हाथों से किया जा रहा है। कारीगरों ने बताया कि बारीक कलाकृति उकेरने के लिए हम मशीनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
करीब दो महीने से काम कर रहे हैं। रामकाज कीन्है बिनु मोहि कहां विश्राम... हर रामभक्त की इच्छा होती है कि वह रामकाज में सहभागी बने। तीन माह से रामघाट कार्यशाला में कार्य में जुटे हैं। -तेजाराम
6 महीने से यहां काम कर रहा हूं। पहले तराशी काम में था अब नक्काशी की जिम्मेदारी संभाल रहा हूं। प्रतिदिन 12 घंटे काम होता है। बारीक नक्काशी के लिए मशीनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। -कृष्णा
राममंदिर निर्माण में सहभागी बनने का सौभाग्य प्राप्त कर बहुत ही हर्ष होता है। हम पूरे उत्साह के साथ काम कर रहे हैं, ताकि राममंदिर की भव्यता में कहीं कोई कसर न रह जाए, समयबद्ध ढंग से काम पूरा होगा। -नेताराम
पत्थरों पर रामकथा आधारित चित्र व देवी-देवताओं के चित्र उकेरे जा रहे हैं। अधिकांश काम हम हाथों से ही करते हैं, राममंदिर स्थापत्य कला का भी बेमिसाल नमूना हो ऐसा हम सभी का प्रयास है।-ऐशाराम
राममंदिर निर्माण की गति तेज कर दी गई है। राजस्थान की तीन और अयोध्या की एक कार्यशाला में पत्थरों की नक्काशी व तराशी का काम किया जा रहा है। दिसंबर 2023 तक रामलला को भव्य गर्भगृह में विराजमान करने के लक्ष्य के तहत काम चल रहा है। सबसे पहले गर्भगृह के पत्थर तैयार किए जा रहे हैं।- डॉ.अनिल मिश्र, ट्रस्टी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र