रामनगरी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां चरम पर हैं। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर वही संयोग बन रहा है, जो 5 हजार वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण के जन्म पर था। इस जन्माष्टमी पर अष्टमी, उदयातिथि व मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है।
इस जन्माष्टमी के पर्व को ज्योतिषी अत्यन्त फलदायक एवं शुभ बता रहे हैं। ख्यातिलब्ध तांत्रिक एवं ज्योतिषाचार्य स्वामी हरिदयाल मिश्र बताते हैं कि इस बार 5 हजार पूर्व का संयोग बन रहा है जैसा भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पर था।
माह, तिथि, वार और चन्द्रमा की स्थिति वैसी ही है जैसी श्रीकृष्ण जन्म के समय थी। इस लिहाज से यह जन्मोत्सव पर्व शुभकारक है। भगवान का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी बुधवार बुधवार को रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चन्द्रमा की स्थिति में हुआ था।
इस बार जन्माष्टमी 25 अगस्त के दिन सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 24 अगस्त को रात्रिकाल 10.13 पर ही लग जाएगी जो 25 अगस्त की रात्रि 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगी।
श्री मिश्र बताते हैं कि कुछ ऐसा ही संयोग 58 वर्ष पूर्व 1958 में भी बना था। 58 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है। भाद्रपद, कृष्ण पक्ष और रोहिणी नक्षत्र के अद्भुत संयोग में मनाया जाने वाला जन्मोत्सव पर्व सर्वोत्तम फलदायक होगा।
कहा, 24 अगस्त बुधवार रात्रि 10.13 बजे से अष्टमी शुरू हो रही है। इस वजह से तिथि काल मानने वाले बुधवार को भी जन्मोत्सव मनाएंगे, लेकिन गुरुवार उदयकाल की तिथि में जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।