राष्ट्रीय स्कूलीं खेलों की फेहरिस्त से लोकप्रिय खेल क्रिकेट नदारद हो गया है। इस पर भारत सरकार पैसा लगाने को तैयार नहीं है। राष्ट्रीय खेल की तर्ज पर खेल मंत्रालय और एसजीएफआई राष्ट्रीय स्कूली खेल कराने की तैयारी में है।
भारत सरकार ने जिन 28 खेलों के आयोजन पर सहमति जताई है, उसमें क्रिकेट को स्थान नहीं मिला है। एसजीएफआई ने क्रिकेट के आयोजन के लिए प्रदेशों से प्रस्ताव ही नही मांगा। इससे इतर एसजीएफआई ने क्रिकेट का आयोजन राज्य सरकार व आयोजकों से कराने का निर्णय लिया है।
सरकार के सहयोग से स्कूली गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) नए सत्र से मान्यता प्राप्त 28 खेलों का आयोजन चार प्रदेशों में कराने जा रहा है। जिन 28 खेलों का आयोजन किया जाना हैं उसमें क्रिकेट को स्थान नहीं मिला है। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन के व्यय का अनुदान केंद्र को देना है। केंद्र के प्राथमिकता वाले खेलों में क्रिकेट को स्थान नहीं मिला है। एसजीएफआई ने भी भारत सरकार के साथ अपनी प्राथमिकता अलग बना ली है।
एसजीएफआई के कैलेंडर में उच्च प्राथमिकता वाले नौ खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती, राइफल शूटिंग, लॉन टेनिस, हॉकी, तीरंदाजी, बॉक्सिंग, भारत्तोलन और प्राथमिकता वाले 14 खेलों में बास्केटबॉल, चेस, कबड्डी, फुटबॉल, तैराकी, साइकलिंग, जिम्नास्टिक, वॉलीबॉल, टेबल-टेनिस, ताइक्वाडों, स्कवैश, जूडो, वुशू, सेपकटकरा, सहित खो-खो, हैंडबॉल, तलवारबाजी, नेटबॉल और कराटे शामिल है। इन्हीं खेलों के आयोजन पर केंद्र सरकार अनुदान देगा।
स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया में प्रदेश के प्रतिनिधि और प्राचार्य डॉ. भीम राव अंबेडकर राज्य विद्यालय क्रीड़ा संस्थान फैजाबाद केके गुप्ता ने बताया कि एसजीएफआई से सूची प्राप्त कराई गई है।
एसजीएफआई की सूची में क्रिकेट का प्रस्ताव नहीं मांगा गया है। बताया कि सभी राज्य इकाइयों को भेजे गए पत्र में 15 खेल का चयन कर आयोजन के लिए प्रस्ताव भेजना है। आयोजक प्रदेश को सात खेलों का आयोजन एक समय में राष्ट्रीय खेल की तर्ज पर कराना होगा। आयोजन में एथलेटिक्स, तैराकी, व जिम्नास्टिक में से एक खेल का आयोजन लेना अनिवार्य होगा।