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लाल बत्तियों का तिलिस्म भी नहीं आ सका सपा के काम

Sat, 11 Mar 2017 11:11 PM IST
फैजाबाद
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शनिवार को गुलाबबाड़ी स्थित सपा कार्यालय में मतगणना के दौरान कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद तेजनरायन पांडेय। - फोटो : अमर उजाला
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पिछली बार पांच में से चार सीट जीतने वाली समाजवादी पार्टी का इस बार सूपड़ा ही साफ हो गया है। अखिलेश यादव को फिर मुख्यमंत्री बनाने और विकास के दावों के साथ मैदान में उतरे प्रत्याशियों का सामाजिक समीकरण भी मोदी लहर में छिन्न-भिन्न हो गया। परिणामों से साफ है कि न तो लाल बत्तियों का तिलिस्म सपा के काम आया, न ही लैपटॉप और स्मार्ट फोन का वादा युवाओं का वोट दिलवा सका। 
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विधानसभा चुनाव में भी इस बार बीते लोकसभा चुनाव की तरह मोदी लहर दिखी। सपा-कांग्रेस गठबंधन से यहां की सभी सीटों पर सपा के उम्मीदवार थे। अखिलेश यादव, आजम खां समेत कांग्रेस नेताओं ने जीत के लिए ताकत झोंक रखी थी।

पूर्व सांसद व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे निर्मल खत्री ने सभी सीटों पर एड़ी-चोटी एक कर रखी थी, फिर भी जीत तो दूर, किसी सीट पर कड़ा संघर्ष तक नहीं दिखा। अयोध्या, मिल्कीपुर, गोसाईगंज, बीकापुर से विधायक देने वाली सपा का सूपड़ा साफ हो गया।
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जबकि जिले में दो मंत्रियों अवधेश प्रसाद, तेजनारायण पवन को लाल बत्ती देने के साथ जयशंकर पांडेय, रुश्दी मियां, महिला विंग की अध्यक्ष लीलावती कुशवाहा, संदीप सिंह को विभिन्न संस्थाओं का अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बना लालबत्ती दी गई थी। लेकिन सपा के बड़े-बड़े दिग्गज धराशाई हो गए।

गोसाईगंज से पिछली बार जीतने वाले अभय सिंह भी हार गए। हराने वाले खब्बू तिवारी थे, जो पिछली बार बसपा से थे। अयोध्या में लल्लू सिंह को हराकर भगवा दुर्ग भेदने वाले वन राज्य मंत्री तेजनारायण पवन को हार का सामना करना पड़ा।

मित्रसेन की सीट को उपचुनाव में एक साल पहले जीतने वाले उनके पुत्र आनंदसेन भी पहली बार मैदान में उतरी शोभा सिंह से हार गए। रुश्दी मियां की एक हजार से कम अंतर की हार इस बार 20 गुना से अधिक हो गई। मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद को नवोदित भाजपा प्रत्याशी गोरखनाथ बाबा ने करारी मात दी।
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