जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों से चुनाव के मैदान में उतरे 54 में से 39 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। भाजपा, बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा पाए। दूसरे दलों के या फिर निर्दल प्रत्याशी जमानत के लिए निर्धारित मानक के करीब भी नहीं पहुंच पाए।
विधानसभा चुनाव में रुदौली विधानसभा क्षेत्र से 14, मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से सात, बीकापुर से दस, अयोध्या से 14 और गोसाईगंज से नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान मैदान में थे। 11 मार्च को मतगणना के बाद जो तस्वीर सामने आई वह न केवल भाजपा की सुनामी के रूप में रेखांकित की गई बल्कि मतों को ध्रुवीकरण भी इतना जबरद्सत देखा गया कि मतदाताओं ने केवल राष्ट्रीय और राज्यीय प्रमुख दलों को छोड़ दूसरे दलों और निर्दल के पक्ष में मतदान नहीं किया।
नियमों के अनुसार किसी भी प्रत्याशी को कुल पड़े वोटों की 1/6 फीसदी वोट जमानत बचाने के लिए मिलना चाहिए। इस हिसाब से रुदौली में जमानत बचाने के लिए कम से कम 34974 वोट मिलने चाहिए थे लेकिन भाजपा, बसपा और सपा कांग्रेस गठबंधन के सिवा कोई भी प्रत्याशी इसके करीब तक नहीं पहुंच पाया।
मिल्कीपुर के लिए यह मानक 33170 मत थे लेकिन इन्हीं तीन दलों के प्रत्याशियों के सिवा कोई भी प्रत्याशी यहीं तक नहीं पहुंच पाया। बीकापुर के लिए यह मानक 37028 था लेकिन तीन को छोड़ कोई भी प्रत्याशी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया।
अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के लिए यह मानक 36248 मत रहा लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे 14 में से 11 प्रत्याशी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। गोसाईगंज के लिए यह मानक 37769 था। यहां से नौ में से तीन प्रत्याशी ही मानक के पार पहुंचे, अन्य छह की जमानत जब्त हो गई।