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सपूतों ने लगाई थी जान की बाजी

Fri, 14 Aug 2015 11:26 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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देश की आजादी में जिले के शहीदों का नाम भी गर्व से लिया जाता है। यहां के सपूतों ने आजादी पाने को अपनी जान की बाजी लगा दी थी। ऐसे शहीदों की वीरगाथाओं को आज भी मिल्कीपुर की धरती पर याद किया जाता है।
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ये इलाका भले की विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ हो लेकिन यहां के युवाओं में जोश और जज्बा हिलोरें मारता है। सैनिक बन मातृभूमि की सेवा में शहीद होकर इतिहास रचना मानों यहां के लोगों के रोम-रोम में समाया हुआ है।

मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र से ईटगांव के राम आधार सिंह, वसांवा के हौसिला प्रसाद, नौगंवा के अवधेश प्रताप तिवारी, चिरौली के रामदेव, अमांवासूफी के कल्लू और मेंहदौना के शुभनाथ पाठक आजादी के बाद विभिन्न लड़ाइयों में शहीद हुए।
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इसके अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों से जो शहीद सपूत हुए उनमें पूरे भग्गू डयोढ़ी के सल्तनत बहादुर सिंह, हरीपुर जलालाबाद के अंगद सिंह, बदौली बड़ागांव के देवीप्रकाश सिंह, पूरे हनुमानगढ़ी दर्शननगर के माताप्रसाद, कबीरपुर गोपालपुर के शिवदेव सिंह, बंदनपुर गोसाईगंज के अंगदप्रसाद सिंह, पड़ैनियापुर टंडौली के मदनगोपाल पांडेय, धौरहरा बेनीगद्दोपुर के जगदंबा प्रसाद, दीनदयाल नगर के जगदंबाप्रसाद पांडेय, विश्नोहरपुर डेहरिया के रामसूरत यादव, मैहरकबीरपुर केरालाल के धीरेंद्र प्रताप सिंह, गंडई खजुरहट के मुरलीधर पांडेय है।ं

वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में पूरे भग्गू के सल्तनत बहादुर सिंह, ईटगांव के राम आधार सिंह, वसांवा के हौसिला प्रसाद, हरिपुर जलालाबाद के अंगद सिंह और अमावा सूफी के कल्लू लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए जबकि 1965 में हुए भारत-पाक की लड़ाई में बदौली के देवीप्रकाश सिंह, पारे हनुमानगढ़ी के माताप्रसाद, वनवीरपुर गोपालपुर के शिवदेव सिंह ने शहादत दी।

1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में वंदनपुर के अंगदप्रसाद सिंह, पड़ैनियापुर टंडौली के मदनगोपाल पांडेय, धौरहरा के जगदंबा प्रसाद और मेहदौना के शुभनाथ पाठक ने अपने प्राणों की आहुति दी।
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