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जरा याद करो कुर्बानी

Fri, 14 Aug 2015 11:23 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में जंग-ए-आजादी के दौर में अवध के इस अंचल का योगदान कम नहीं रहा। सत्तावनवीं क्रांति का आगाज भले बैरकपुर से हुआ हो, जब मंगल पांडेय ने अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा हो, लेकिन इस घटना का गहरा रिश्ता फैजाबाद से रहा है। क्योंकि यहां के रहीमपुर दुगवा गांव से सत्तावनवीं क्रांति के नायक का संबंध माना जाता है।
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ब्रिटिश सेना में अवध के बाशिंदों की तादाद काफी अधिक थी, इसलिए जब 1857 की क्रांति की चिंगारी फूटी तो उसके असर से अवध का यह इलाका काफी प्रभावित हुआ। आजादी की लड़ाई में अशफाक उल्ला ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

अशफाक का जन्म तो शाहजहांपुर में हुआ था, लेकिन फैजाबाद जेल में उन्हें फांसी दी गई। रामप्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आने के बाद अशफाक हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के सदस्य बन गए। ट्रेन से जा रहे खजाने को नौ अगस्त को काकोरी में क्रांतिकारियों ने लूट लिया, जिसके कारण इस घटना को काकोरी कांड कहा जाता है।
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अशफाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। फैजाबाद जेल में फांसी दिए जाने के एक दिन पहले अशफाक ने मां को पत्र लिखा कि जेल में कल दो लोगों की फांसी होगी। एक वह जिसने पट्टीदार की हत्या की तथा दूसरा तुम्हारा बेटा।

तुम्हारा बेटा देश के लिए मरेगा, जिस पर तुम्हें गर्व होगा। इस बेटे की मौत पर तुम मत रोना कांड जिले का क्या योगदान रहा। मसलन जिले के किन लोगों ने कहां संघर्ष किया। अशफाक के शहादत स्थल पर हर वर्ष 19 दिसंबर को क्रांतिकारियों की याद में मेले का आयोजन होता है।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में यहां पर रेल रोको, सड़क जाम आंदोलन और गांधी आश्रम में चरखा यज्ञ व भूमिगत आंदोलन हुआ। इस कालावधि में रनीवा आश्रम गांधीवादी आंदोलन का बड़ा केंद्र रहा।

 सीताराम सिंह, रामनारायण त्रिपाठी, राजबली यादव, मदन गोपाल वैश्य, रामप्रसाद सिंह, महात्मा हरगोविंद, ठाकुर प्रसाद त्रिपाठी, मुख्तार अहमद, मौलवी नसीर, उमाशंकर मस्त, कमलावती चौरसिया, आशा त्रिपाठी आदि प्रमुख हैं। गांधी आश्रम में चरखा यज्ञ हुए।

बंगाल के धीरेन मजूमदार व अक्षय कुमार कर्ण ने भीटी में रनीवा आश्रम की स्थापना की। धीरेन मजूमदार ने फैजाबाद को अपना कार्य क्षेत्र बनाया। यह आंदोलन घर-घर सूत बांटने व चरखा चलाने का था।

दीनदयाल इंटर कॉलेज बाकरगंज की छात्रा कविता सिंह ने कहा कि आजादी के बारे में थोड़ा बहुत जानती हूं। फैजाबाद का योगदान रहा है और गांधी जी भी अयोध्या में आए थे।

एसएसवी इंटर कॉलेज के छात्र शिवम पांडेय ने कहा कि किताबों से हमने बहुत कुछ जाना ही है, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों से भी जिले के इतिहास व क्रांतिकारी आंदोलनों के विषय में सुना है।

बीएल इंटर कॉलेज पूरा के छात्र सचिन का कहना है कि हम इलाके के बारे में क्रांतिकारी रामप्रसाद सिंह की कहानियां सुनते आए हैं, जिसके कारण क्रांतिकारी इतिहास के प्रति रुझान बढ़ा।

बीएल इंटर कॉलेज पूरा के छात्र विवेक पांडेय ने कहा कि हमारे क्षेत्र का आजादी दिलाने में योगदान रहा है।  अशफाक की शहादत यहीं हुई थी। जेल में होने वाले आयोजन में स्कूल की ओर से बहुत पहले गया था तो जानकारी हुई।

सामाजिक कार्यकर्ता कैलाशचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह दुख की बात है कि नई पीढ़ी अपने क्रांतिवीरों को भुलाती जा रही है। आज जरूरत है, उन्हें इस बात का अहसास कराने की कि कितनी मुश्किलों से यह आजादी हासिल हुई है। वर्तमान यदि अतीत के सौंदर्य से प्रभावित होगा तो सुंदर भविष्य का सृजन होता है। हमारे देश में यह अतीत व वर्तमान में लयताल कम दिखाई पड़ रही है।

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बब्बन सिंह ने कहा कि युवाओं का रुझान जिस ओर दिख रहा है, वह देश व समाज के लिए खतरनाक है। आज युवा व्यावसायिक शिक्षा की ओर भाग रहे है। पैसा कमाने की होड़ है। आधुनिकता का लिबास ऐसा ओढ़ा है कि अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं।
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