अयोध्या। इस बार निकाय चुनाव के लिए आरक्षण को लेकर कोई भी संतुष्ट नहीं हो सकता। इसके पीछे कारण जिलों से की गई कसरत का अंतिम फैसला सॉफ्टवेयर करेगा। वही बताएगा कि कौन सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा।
इस बीच जिले के सभी आठ निकायों के आरक्षण का प्रस्ताव शासन पहुंच गया है। निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है। व्यवस्था से राजनीतिक दलों तक की निगाह आरक्षण सूची पर लगी है।
जिले की नगर पालिका सहित सात निकायों के आरक्षण का प्रस्ताव तो पहले ही शासन को भेजा जा चुका था, लेकिन नगर निगम का प्रस्ताव नहीं गया था। इसको लेकर शासन की नाराजगी झेलनी पड़ी।
चर्चा रही कि इसके कारण प्रदेश के चार जिलों में अयोध्या भी शामिल हो गया। जो आरक्षण का प्रस्ताव नहीं भेज सके थे। फिलहाल मंगलवार को नगर निगम से भी आरक्षण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
अब आरक्षण सूची को लेकर कार्रवाई तेज होने के आसार है। इस बार वार्डों के आरक्षण से मेयर और अध्यक्ष पद के को लेकर आरक्षण की प्रक्रिया में फेरबदल बताया जा रहा है।
शासन ने जिलों से आरक्षण को लेकर प्रस्ताव मांग लिया है। स्थानीय स्तर पर वार्डवार सामान्य, अन्य पिछड़ा और अनुसूचित जाति/जनजाति के आंकड़े के मुताबिक इसको लेकर प्रस्ताव भी तैयार करके शासन को भेज दिया गया।
मेयर और अध्यक्ष पद के लिए डाटा ही भेजा जा सकता है क्योंकि इसका आरक्षण प्रदेश स्तर किए जाने की व्यवस्था बताई गई है, फिर तकनीकी रूप से नवसृजित निकाय, सीमा विस्तार सहित बिना सीमा विस्तार वाले निकाय के लिए मानक के अनुसार कार्रवाई भी है।
जिलों से भेजे गए आरक्षण संबंधी प्रस्ताव अंतिम नहीं होगा। इसका अंतिम परीक्षण तकनीकी रूप से सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाएगा। नोडल अफसर व एडीएम एलए पीके अवस्थी बताते हैं कि यहां से प्रस्ताव गया है।
इसके आंकड़े सॉफ्टवेयर में फीड किए जाएंगे। सॉफ्टवेयर से कौन सा वार्ड किसके लिए आरक्षित हो रहा है, पता चल जाएगा। इसके बाद आरक्षण सूची का अनंतिम प्रकाशन होगा।
इस पर आपत्तियां ली जाएंगी। इनके निस्तारण के बाद आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसी के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे।