बीएसए ने कहा कि जो भी जिम्मेदार दूध पिलाने में अरुचि दिखाएंगे उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्यवाही की जाएगी। इस पर शिक्षकों व प्रधानों ने विरोध जताना शुरू कर दिया।
हैरिंग्टनगंज के शिक्षक सरवरे आलम ने कहा कि साहब! धमकी न दीजिए, धन की व्यवस्था कीजिए, तभी दूध पिला पाएंगे। इसके बाद कई शिक्षकों व प्रधानों ने सरवरे आलम के सुर में सुर मिलाया। हंगामा बढ़ता देख बीएसए बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए।
सहायक निदेशक सभागार में सोमवार को बैठक शुरू हुई तो मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक विनय त्रिपाठी ने कहा कि जिसको जो समस्या हो, उसे लिखकर दे।
इसके थोड़ी देर बाद ही बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी बैठक में शामिल होने के लिए आ गए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि बच्चों को हर बुधवार को दूध पिलाना है और इसमें आप सभी का सहयोग चाहिए।
जब शिक्षकों ने दूध के लिए धन आवंटन की मांग उठाई तो उन्होंने कहा कि प्रस्ताव भेजा गया है, शीघ्र ही धन की व्यवस्था हो जाएगी। जब तक दूध के मद का धन नहीं मिलता है, कनवर्जन कॉस्ट से दूध का बंदोबस्त करे।
प्रधानों व प्रधानाध्यापकों के हठ को देख बीएसए ने कहा कि कनवर्जन कॉस्ट से
भुगतान करिए। बच्चों को 50 एमएल ही दूध पिलाइए लेकिन पिलाइए जरूर।
उन्होंने कहा कि जिले में 76 प्रतिशत स्कूलों में दूध पिलाया जा रहा है।
सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है। यह जरूरी है
कि इन बचे हुए स्कूलों में भी बुधवार को बच्चों को पीने के लिए दूध मिले।
जब कई लोगों ने असहमति जताई तो बीएसए ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही। बीएसए के आक्रामक रुख से प्रधान व प्रधानाध्यापकों के तेवर तल्ख हो गए।
प्रधान व शिक्षकों के रुख को भांपते हुए बीएसए बैठक समाप्त होने के पहले ही चले गए। बैठक में चंद्रजीत यादव, किरनलता मिश्र, समरजीत सिंह, अरुण तिवारी, अजीत सिंह, देवनारायन, ज्ञानस्वरूप सिंह, अशोक जायसवाल, अमरजीत सिंह, पंकज द्विवेदी, सोनू सिंह सहित दर्जनों शिक्षक एवं प्रधान मौजूद रहे।