साकेत वासी गौरीशंकर दास -फाइल फोटो। -संवाद
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अयोध्या। कनकबिहारी और सरयू मैया को जीवन भर अपने राग रागनियों से आह्लादित करने वाले महान संगीत साधक गौरीशंकर दास गवैया (85) का रविवार देर रात निधन हो गया है। श्रीराम के उत्सवों को अपने सुर से सजाने वाला स्वर शांत होने से रामनगरी स्तब्ध हो उठी है। सरयू तट पर सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
छह जनवरी को ब्रेन हैमरेज होने के बाद उन्हें लखनऊ के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें रविवार को ही अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। देेर रात गोलाघाट स्थित आश्रम पर उनका निधन हुआ। उनके निधन की सूचना से रामनगरी में शोक की लहर दौड़ गई, हर कोई संगीत साधक को नमन करने निकल पड़ा।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामानंद शुक्ल ने कहा कि अयोध्या की भक्तिमयी संगीत परंपरा की कड़ी रहे स्मृतिशेष भगवान दास और पागलदास की श्रीवृद्धि करने वाले ध्रुपद के शास्त्रीय गायक अयोध्या की वर्तमान परंपरा के शिखर पुरुष बाबा गौरीशंकर का अनंत में विलीन होना दुखदाई है। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि अयोध्या के मार्गी संगीत की आखिरी अनुपम धरोहर बाबा गौरीशंकर का स्वर भी आखिरकार सरयू से एकाकार हो गया।
महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि एक महात्मा को युगल सरकार ने उनका गान सुनने के लिये नित्य धाम में बुला लिया है। गौरीशंकर की संगीत परंपरा संभालना भी बड़ी चुनौती होगी। अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि संगीत जगत के मूर्धन्य ध्रुपद गायक का निधन संगीत परंपरा की अपूर्णनीय क्षति है।
हाल ही में गवैया जी को सम्मानित करते वाले महंत गिरीशपति त्रिपाठी अवाक थे। कहा कि उन्होंने कई दशकों तक कनक बिहारी सरकार व सरयू मैया को अपना गान सुनाया। श्रीराम के उत्सवों को सुर से सजाने वाला स्वर शांत हो गया। महंत कमलनयन दास, महंत मैथिलीरमण शरण, जगद्गुरु रत्नेश प्रपन्नाचार्य, पागल दास के शिष्य विजय रामदास, संगीतज्ञ एमबी दास सहित बड़ी संख्या में उनके अनुरागी दुखी हैं।