रामनगरी का एकमात्र राजकीय श्रीराम चिकित्सालय आपात स्थिति से निपटने को तैयार नहीं है। अस्पताल में एंबुलेंस तो है पर ड्राइवर नहीं है। चिकित्सालय में तीन एंबुलेंस हैं, जिनमें एक वर्तमान में रिपेयरिंग में हैं, जबकि दो गाड़ियां ठीक हालत में चिकित्सालय परिसर में खड़ी हैं।
तीनों एंबुलेंस को चलाने के लिए तीन ड्राइवरों की आवश्यकता है, लेकिन मौके पर एक भी ड्राइवर नहीं है। एक ड्राइवर काशी सिंह हैं जो एडी आफिस से संबद्ध हैं, उनकी भी ड्यूटी इन दिनों नगर निकाय चुनाव में लगा दी गई है। वर्तमान में श्रीराम चिकित्सालय एंबुलेंस ड्राइवर विहीन है।
आकस्मिक स्थिति में एंबुलेंस सेवा अस्पताल प्रशासन नहीं उपलब्ध करा सकता। आपात स्थिति में यदि किसी मरीज को जिला चिकित्सालय या फिर लखनऊ उपचार के लिए रेफर किया जाय तो उसे अपने ही वाहन जाना होगा। यही नहीं अस्पताल में कई महत्वपूर्ण पद भी सृजित नहीं है।
कार्डियोलॉजिस्ट, ईएमओ, अधीक्षक, सहित ईएनटी सर्जन के पद रिक्त हैं। श्रीराम अस्पताल अयोध्या में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। आस-पास के जिलों गोंडा, बस्ती, हरैया, टांडा, अंबेडकरनगर से भी मरीजों का आना होता है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल में एंबुलेंस ड्राइवर की नियुक्ति आज तक हुई ही नहीं। एडी आफिस में नियुक्त काशी सिंह से यहां गाड़ी चलवाई जाती हैं।
श्रीराम चिकित्सालय में एंबुलेंस चालक की स्थायी नियुक्ति के लिए कई बार शासन से पत्राचार किया जा चुका है। ड्राइवर के अभाव में आपातकालीन स्थिति में 108 नंबर एंबुलेंस की सेवाएं मरीजों द्वारा ली जाती हैं। चालक न होने से समस्या उत्पन्न हो रही है।
- डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस