अयोध्या। राममंदिर निर्माण को लेकर तराशे गए पत्थरों को चमकाकर रामजन्मभूमि परिसर तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए एजेंसियां अयोध्या आकर पत्थरों की सफाई के लिए ट्रायल दे रही हैं। सोमवार को एक और कंपनी केएलए कंस्ट्रक्शन नईदिल्ली की तीन सदस्यीय टीम न्यास कार्यशाला पहुंची। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और विशेषज्ञों का कहना है कि तराशे गए पत्थरों को चमकाने में काफी समय लगेगा। फिलहाल यहां ट्रायल देने आ रही कंपनियों ने 3 माह में पत्थरों को चमकाने का वादा किया है।
चूंकि लंबे समय से खुले आसमान के नीचे होने के कारण इन पत्थरों की चमक धूमिल हो गयी है इसलिए रामजन्मभूमि परिसर में इन्हें पहुंचाने से पहले इनकी साफ-सफाई की जानी है। यह कार्य एक विशेषज्ञ कंपनी को करना है। इसके लिए ट्रस्ट की ओर से कई कंपनियों से संपर्क किया गया है। जिसके बाद कुछ कंपनियां अयोध्या आकर सफाई का ट्रायल दे रही हैं। सोमवार को केएलए कंस्ट्रक्शन कंपनी दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम न्यास कार्यशाला पहुंची। इसके पूर्व कंपनी के सदस्यों ने राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। कंपनी के डायरेक्टर संदीप गर्ग ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से उन्हें सफाई के लिए ट्रायल देने को बुलायागया है।
बताया कि अभी केवल ट्रायल किया जा रहा है, यदि राम की कृपा से ट्रस्ट यह सेवा का अवसर देता है तो विभिन्न प्रकार की मशीनों एवं केमिकल के जरिए पत्थरों को इस तरह से साफ किया जाएगा कि उनकी चमक आकर्षित करेगी। कहा कि चूंकि कार्यशाला में करीब सवा लाख घनफुट पत्थर रखे हुए हैँ जिनमें से अधिकांश में काई जम गयी है, इसलिए पहने इन्हें क्रेन के सहारे हटाकर अलग-अलग साफ किया जाएगा, इस कार्य में कम से कम तीन महीने तो लग ही जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी ट्रस्ट की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार है, अभी तो सिर्फ ट्रायल देने आए हैं।
श्रीरामजन्मभूमि न्यास की कार्यशाला 1992 में शुरू हुई। कार्यशाला जब शुरू हुई तो 125 कारीगर और शिल्पी लगे थेद्घ ढांचा विध्वंस के बाद काम प्रभावित हुआ लेकिन 50 कारीगरों ने काम जारी रखा। 10 साल तक 50 कारीगर ही लगे रहे।2007-2010 तक पत्थरों की कमी के कारण काम बंद रहा। 2011 से फिर काम शुरू हुआ और पांच कारीगरों और पांच मजदूरों को लगाया गया। दिसंबर 2015 में दो ट्रकों से 500 घनफुट पत्थर राजस्थान से लाए गए, जिसके लिए दो कारीगर और पांच मजदूर काम पर लगे। 1992 से शुरू हुई तराशी के बाद अब तक राममंदिर की पहली मंजिल के लिए करीब सवा लाख घनफुट पत्थरों की तराशी की जा चुकी है। प्रस्तावित राममंदिर मॉडल में दो मंजिला राममंदिर के लिए करीब दो लाख घनफुट पत्थर तराशे जाने हैं। कार्यशाला में 28 सालों से तराशे गए पत्थर रखे गए हैं, जिनकी चमक आज धूमिल पड़ गयी है।