अयोध्या। रामनगरी के तकपुरा में स्थित श्रीराम नाम अंकित दुर्लभ वृक्ष रामनाम के संरक्षण की मांग जोर पकड़ने लगी है। रामनगरी के संत-धर्माचार्यों एवं विहिप ने इस अद्भुत वृक्ष के संरक्षण की मांग उठाई है। राम की नगरी अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र की पावन परिधि में स्थित यह वृक्ष लोगों की आस्था का केंद्र है,और स्थानीय लोग इस वृक्ष की पूजा-अर्चना करते हैं। इस वृक्ष की चमत्कारी प्रकृति के बारे में विश्वास करना आसान नहीं है लेकिन, इस वृक्ष के चित्र देखने के बाद लोगों को विश्वास हो जाएगा।
अयोध्या नगर से सटे ग्रामीण क्षेत्र भीखी का पुरवा से कुछ दूरी पर गोरखपुर-अयोध्या हाईवे पर मुख्य सड़क मार्ग से किनारे मौजूद गांव तकपुरा पूरे निरंकार के एक खेत में मौजूद इस वृक्ष के बारे में आस-पास के लोग बहुत अच्छी प्रकार से जानते हैं। इसे रामनाम वृक्ष कहकर पुकारा जाता है। कदम प्रजाति के इस वृक्ष की जड़ और डालियों पर भगवान राम का नाम प्राकृतिक रुप से अंकित हुआ है और समय के साथ-साथ राम नाम की संख्या बढ़ती ही जा रही है। वर्ष में एक बार इस वृक्ष के नीचे बड़ा भारी मेला लगता है। यहां पर नियुक्त पुजारी प्रति दिन निष्ठा भाव से प्रात: इस अवलौकिक दर्शनीय वृक्ष की पूजा करते हैं। मान्यता है की जो व्यक्ति इस वृक्ष की पूजा करता है उसके सभी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट दूर हो जाते हैं और वे सुखी जीवन यापन करता है।
इस वृक्ष के वानस्पतिक नाम व अन्य वनस्पतिक गुणों के निर्धारण के लिए अवध विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार चौधरी तथा विवि के पूर्व उद्यान अधीक्षक डॉ. राजकिशोर चार साल से शोधरत हैं। इनके द्वारा लंदन स्थित रॉयल बॉटनिकल गार्डन, किव यूके के वैज्ञानिकों से सतत संपर्क किया जा रहा है उन्हें आशा है कि शीघ्र ही इस पौधे का वनस्पति नामकरण और पहचान स्थापित हो जाएगी।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष मणिराम दास जी छावनी महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का कहना है कि यह दुर्लभ वृक्ष का प्रकटीकरण समस्त अयोध्या वासियों के लिए शुभ और आश्चर्य चकित करने वाला है। उन्होंने कहा यह तो साक्षात भगवत कृपा है कि अयोध्या मे रामनाम को अंगीकार करने वाले वृक्ष की उत्पति हुई है। इसकी पूजा-अर्चना नित्य चलती रहनी चाहिए तथा भक्तों के दर्शनार्थ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए।
सदगुरुसदन गोलाघाट के महंत शियाकिशोरी शरण महाराज ने राम-नाम वृक्ष को साक्षात भगवान का स्वरूप बताया और कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि के कण-कण में प्रभु का वास है। मठ-मंदिर हो या माता सरयू की पवित्र धारा या फिर पशु, पक्षी, जीव-जंतु सभी में प्रभु का वास तथा सभी भगवान की उपस्थिति के संवाहक हैं। यह दिव्य दर्शनीय वृक्ष अयोध्या के लिए गौरव है।
विहिप केंद्रीय प्रबंध समिति सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने ऐसे दुर्लभ वृक्ष की उपस्थित को कल्याणकारी और मंगलकारक बताया और कहा जो लोग तुष्टिकरण के कारण भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताते रहे हैं, उन्हे अयोध्या की पवित्र धरती पर आकर इस पुण्यदायी वृक्ष को दिन में खुली आंखों से देखकर कर अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से श्रीराम नाम अंकित वृक्ष को सुरक्षित, संरक्षित और क्षेत्र को विकसित करने की मांग उठाई है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से वृक्ष के संबंध मे चर्चा की गई है। उन्होंने इसे प्रभु प्रदत्त चमत्कार बताया और कहा लॉकडाउन की समाप्ति के उपरांत ऐसे अद्भुत वृक्ष का दर्शन अवश्य करना सौभाग्य समझूंगा। उन्होंने कहा है कि हमारी सरकार प्रारंभ से ही ऐतिहासिक-पुरातात्विक साक्ष्यों को संरक्षण प्रदान करने हेतु संवेदनशील है। ऐसे दुर्लभ वृक्ष का हर प्रकार से संरक्षण-संवर्धन किया जायेगा।