अयोध्या। लॉकडाउन में निर्माण कार्यों को मिली छूट से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राममंदिर के लिए भूमि पूजन की तैयारी तेज कर दी है। सुरक्षा और दर्शन के लिए गर्भगृह के आसपास लगाई गई लोहे की सघन घेराबंदी व जाली समेत सीआरपीएफ के कैंप को हटाने का कार्य बृहस्पतिवार से शुरू कर दिया गया है। इसी के साथ भूमि के समतलीकरण के लिए लार्सन एंड ट्रबो के इंजीनियरों पर्यवेक्षण में स्थानीय पीडब्ल्यूडी की टीम लगा दी गई है। यहां कैंप कर रहे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आफिसियो ट्रस्टी जिलाधिकारी अनुज कुमार झा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री को बुलाने से पहले मुकम्मल तैयारी का खाका बन गया है।
श्रीरामजन्मस्थान को लेकर सदियों की लड़ाई बीते नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसले ने पूरी तरह समाप्त कर दिया था। लेकिन, छह मात बीतने के बाद भी राममंदिर निर्माण को लेकर एक ईंट तक नहीं रखी गई है। केंद्र सरकार ने तीन माह के भीतर 19 फरवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाकर यहां मणिरामदास की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय टीम को स्वतंत्र होकर राममंदिर बनाने का दायित्व सौंप दिया। ट्रस्ट के अधीन सेवानिवृत वरिष्ठ आईएएस नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में भवन निर्माण समिति ने अयोध्या आकर पहले से विश्वहिंदू परिषद की ओर से राममंदिर के लिए शिलाएं तराशने से लेकर अन्य तैयारी देखी। लगभग तय था कि राननवमी से पहले रामजन्मभूमि को समतल कराकर अप्रैल के आखिर सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राममंदिर का भूमि पूजन होगा, मगर वैश्विक कोरोना संक्रमण ने सभी तैयारी पर पानी फेर दिया।
अब लॉकडाउन के तीसरे चरण में निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर मिली छूट से ट्रस्ट प्रशासन उत्साहित है। गर्भगृह से पहले ही नवरात्र के पहले दिन यहां आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला समेत चारों भाईयों के विग्रह व हनुमानजी की प्रतिमा को वहां से करीब दो सौ मीटर पूरब अस्थाई मंदिर में स्थापित कर दिया था। डीएम अनुज कुमार झा की ओर से मंदिर के नक्शीे के मुताबिक गर्भगृह के चारों ओर लगाई गई लोहे की पाईप की घेराबंदी, लोहे की जाली, अस्थाई सुरक्षा कर्मियों के कैंप आदि को हटाकर समतल कराने का कार्य जोरों पर है।
पीडब्ल्यूडी खंड दो की ओर से वाहनों में मजदूरों को लाकर कड़ी जांच के बाद काम पर लगाया जा रहा है। ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र को लोहे की सफाई कार्य को रोजाना मॉनीटर करने की जिम्मेदारी दी गई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कहते हैं कि अब तेजी से राममंदिर निर्माण की कार्ययोजना पर आगे बढ़ने का वक्त है। राममंदिर लार्सन एंड ट्रूबो नो प्राफिट नो लॉस पर बनाएगी, इसके मालिक से स्व. अशोक सिंहल बहुत पहले ही कार्य करने के लिए सहमति ले चुके थे। इंजीनियरों ने गर्भगृह समेत आस-पास की मिट्टी का परीक्षण कर लिया है। बहुत जल्द ट्रस्ट की बैठक में भूमि पूजन की तिथि तय हो सकती है।
रामजन्मभूमि परिसर में श्रीराम लला का भव्य मंदिर निर्माण को लेकर बुधवार को वीडियो कॉलिंग के जरिए राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्यों ने राम मंदिर निर्माण की रणनीति बनाई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य विभिन्न चरणबद्ध तरीके से किया जाना है। पहले चरण में भगवान श्री रामलला को अस्थाई भवन में शिफ्ट कर दिया गया है तो, वहीं दूसरे चरण का भी कार्य किया जा रहा है। दूसरे चरण में राम मंदिर निर्माण स्थल की साफ सफाई का कार्य किया जाना था।
रामलला को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किए जाने के बाद टेंट को हटा दिया गया है और उस स्थान के आसपास लगे लोहे की रैलिंग को हटाए जाने का कार्य किया जा रहा है। अब भूमि के समतलीकरण का कार्य प्रारंभ होगा। श्री राय ने बताया कि राम मंदिर निर्माण को लेकर 4 अप्रैल को होने वाली बैठक को महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। जिसके बाद ट्रस्ट के सदस्यों ने वीडियो कालिंग के माध्यम से बुधवार को बैठक आयोजित की गई। इसमें मंदिर निर्माण के लिए चल रहे कार्यों की जानकारी दी गई। कहा कि कोरोनावायरस मंदिर निर्माण के कार्य में बाधा बना। कुछ कार्य धीमा हुआ। है। मंदिर निर्माण का कार्य बड़ा है और बड़ी कार्यों में छोटी मोटी बाधाएं आती रहती हैं।
राममंदिर ट्रस्ट का कार्यालय भी शीघ्र खुल जाएगा। रामजन्मभूमि परिसर के समीप स्थित रामकचेहरी मंदिर में ट्रस्ट के कार्यालय का निर्माण चल रहा है। लॉकडाउन के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ, इसलिए ट्रस्ट का कार्यालय खुलने में समय लग रहा है। राममंदिर के ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र बताते हैं कि ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, कंप्यूटर आदि आ गए हैं, केवल फिनिशिंग बाकी है। स्थिति सामान्य होते ही कार्यालय का संचालन भी प्रारंभ कर दिया जाएगा।
लॉकडाउन के बीच विहिप भी संगठन को सक्रिय रखने में जुटी है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए उनसे लॉकडाउन के बाद से ही महीने में कम से कम दो बार वार्ता की जाती है। बताया कि दिल्ली, इंदौर, रोहतक, हैदराबाद सहित अन्य राज्यों में मौजूद संगठन के पदाधिकारियों के साथ बातचीत कर उनसे संगठन की नीतियों आदि को लेकर चर्चा की जाती है, आगे की रणनीति पर भी विचार होता है। उन्होंने कहा कि हम संगठन को सक्रिय रखने के लिए बातचीत करते हैं।