अयोध्या लाया जा रहा नर्मदेश्वर शिवलिंग
नर्मदेश्वर शिवलिंग की ओंकारेश्वर से अयोध्या तक की यात्रा 18 अगस्त को ओंकारेश्वर, इंदौर से शुरू होगी। अवधूत नर्मदानंद बाप जी के नेतृत्व में निकली यह यात्रा 22 अगस्त की रात अयोध्या पहुंचेगी। 23 को ओंकारेश्वर से लाए जा रहे शिवलिंग को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा जाएगा। दरअसल, राम मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कराने का विचार श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय का था। वह वैदिक महत्व वाले शिवलिंग की खोज में थे। यह दावा शिवलिंग लेकर आ रहे नर्मदानंद बाप जी का है।
नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना किए जाने की योजना
उन्होंने अमर उजाला को बताया कि अयोध्या के राममंदिर परिसर में एक आयताकार परकोटा भी बनाया जा रहा है, जो 14 फीट चौड़ा होगा। इस परकोटे में छह अलग-अलग मंदिर बनाए जा रहे हैं, जिसमें एक शिवमंदिर भी होगा। इसी शिव मंदिर में ओंकारेश्वर से ले जाए जा रहे नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना किए जाने की योजना है।
हर दिन हो रही शिवलिंग की पूजा
बताया है कि चंपत राय के अनुरोध पर अक्षय तृतीया के दिन इस शिवलिंग को ओंकारेश्वर में नर्मदा के नृसिंह कुंड से प्राप्त किया गया है। यह चमकदार हल्के लाल रंग के शिवलिंग के रूप में है। इस शिवलिंग की प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जा रही है। इसकी ऊंचाई 48 इंच, चौड़ाई 15 इंच और व्यास 68 इंच है। इस संबंध में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी का कहना है कि शिवलिंग कहां स्थापित होगा, यह अभी तय किया जाएगा, पूरे सम्मान के साथ इसको प्रतिष्ठित किया जाएगा।
नर्मदा का हर कंकर हो जाता है शंकर
मान्यता है कि नर्मदा के बहाव में बहकर एक साधारण पत्थर शिवलिंग का रूप ले लेता है। यह माना जाता है कि नर्मदा से निकले शिवलिंग रूपी पत्थर को प्राणप्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है, इसे नर्मदेश्वर महादेव कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार नर्मदा का हर कंकर शंकर हो जाता है। मां नर्मदा का वेग पानी के भीतर अत्यधिक तेज होता है। अखिल ब्रह्मांड में नर्मदा एक मात्र ऐसी नदी है, जिसके जल में गुण विद्यमान है।