चलनी से चांद का दीदार करतीं सुहागिनें।
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दिनभर निर्जला व्रत रहीं सुहागिनों का करवा चौथ व्रत देर रात पूरा हो गया। चंद्रमा निकलते ही घरों की छतों पर ऐसी सुहागिन महिलाएं पहुंचीं। पूजा पाठ के बाद सभी ‘चांदनियों’ ने अपने ‘चांदों’ का चलनी से दीदार किया और पति के हाथों से प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ा।
ईश्वर से पति के दीर्घायु की कामना की। इसके बाद सुहागिनों ने पति के साथ ही अपने सास-श्वसुर और बड़े बुजुर्गों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। करवा चौथ व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
साथ ही इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। बुधवार को सुहागिन महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े धारण कर पूरा शृंगार किया। पार्वती ने कठिन तपस्या से शिव को पाकर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था, इसलिए करवा की पूजा-आराधना के साथ शिव-पार्वती की पूजा हुई।
व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा की पूजा की। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया। करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा ससुर के समकक्ष किसी सुहागिन को पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट की।