अयोध्या। पांच साल तक के बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए लगने वाली न्यूमोकोकल कॉन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) जिले के सरकारी अस्पतालों में दो माह से नहीं है।
इसकी वजह से जिले के करीब 28 हजार बच्चों का सुरक्षा चक्र प्रभावित हो गया है। समय सीमा पूरी होने पर वैक्सीन लगवाने के लिए बच्चों को लेकर अभिभावक केंद्रों पर पहुंच रहे हैं मगर वहां वैक्सीन न होने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है।
बच्चों को न्यूमोकोकस बैक्टीरिया से होने वाली निमोनिया व दिमागी बुखार जैसी बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में न्यूमोकोकल कॉन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) को शामिल किया था।
डेढ़ माह से 24 माह के बच्चों को पीसीवी की तीन खुराक दी जाती है। पहला टीका बच्चों को जन्म से 1.5 माह, दूसरा टीका 2.5 माह, तीसरा 3.5 माह और बूस्टर टीका 16 से 24 माह पर लगाया जाता है। सर्दियों के मौसम में इस टीके की और जरूरत होती है, क्योंकि इस समय में बच्चों में निमोनिया की संभावना अधिक रहती है।
जिले में प्रत्येक बुधवार व शनिवार को जिला महिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी व स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर नियमित टीकाकरण कराया जाता है।
इन केंद्रों पर अन्य टीकों के अलावा पीसीवी टीके की प्रतिमाह 14 हजार खुराक की आवश्यकता होती है। लेकिन दो माह से जिले में पीसीवी की आपूर्ति नहीं हुई है। इसकी वजह से करीब 28 हजार बच्चों का निमोनिया से बचाव के लिए सुरक्षा चक्र टूट गया है।
टीका लगवाने की निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद अभिभावक भी केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं। जिला महिला अस्पताल के टीकाकरण केंद्र पर भी बुधवार को पीसीवी लगवाने के लिए कई बच्चों को लौटना पड़ा। सभी ने सिस्टम की खामियों पर आक्रोश भी जताया।
-निमोनिया, दिमागी बुखार व कान के संक्रमण आदि से बचाने के लिए बच्चों को पीसीवी लगाया जाता है। इसे 1.5 माह, 2.5 माह, 3.5 माह व 16 माह से 24 माह के बीच बूस्टर डोज लगाया जाना चाहिए। किसी कारण से शेड्यूल टूट जाने पर यदि बच्चा दो साल से कम का है तो पहली खुराक के एक माह के बाद दूसरा डोज लगाया जा सकता है।
-डॉ. आनंद शुक्ला, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज
-जिले में प्रतिमाह 14 हजार खुराक पीसीवी की जरूरत होती है। दो माह से जिले में पीसीवी की उपलब्धता नहीं है। शासन को डिमांड भेजी गई है। आपूर्ति होते ही टीकाकरण प्रारंभ होगा।
-डॉ. अजय राजा, सीएमओ