अयोध्या। ज्येष्ठ पूर्णिमा व सरयू जयंती के अनुपम संयोग पर रविवार को रामनगरी में उत्सव का माहौल रहा। अयोध्या का सरयू तट शाम होते ही महाआरती से आलोकित हो उठा। छह से अधिक संस्थाओं ने झांकियां सजाईं जिसका दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी आकर्षण चुराया। बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने महाआरती में शामिल होकर सरयू में दीपदान कर मनौती भी मांगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर रामनगरी में ब्रह्ममुहूर्त से ही सरयू स्नान, दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था। शाम होते-होते रामनगरी का सरयू तट भक्तों से पट गया। सरयू जयंती का मुख्य उत्सव सहस्त्रधारा घाट पर आंजनेय सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित अवध सरयू महोत्सव का रहा। यहां महंत शशिकांत दास के संयोजन में मां सरयू की 5151 बाती की महाआरती का आयोजन किया गया। जय सरयू मैया...के जयकारों से पूरा सरयू तट गूंज उठा। मां सरयू की भव्य झांकी के दर्शन के लिए भक्तों में होड़ सी रही। पूरे सरयू तट की भव्य सजावट आकर्षित कर रही थी। सरयू की लहरों में दीपदान से ऐसा लग रहा था मानो आसमान के तारे जमीं पर उतरकर टिमटिमा रहे हों। उत्सव का संचालन महंत मनीष दास ने किया। महाआरती में महंत कमलनयन दास, महंत बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, महंत मैथिलीरमण शरण, महंत अवधेश दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, अधिकारी राजकुमार दास, महंत रामभूषण दास कृपालु आदि मौजूद रहे।
वहीं श्री अयोध्या तीर्थ पुरोहित जनकल्याण समिति द्वारा भी महाआरती व झांकी का आयोजन किया गया। यहां आरती के संयोजक अधिवक्ता देवांशु पांडेय ने बताया कि मां सरयू की 5001 बाती की आरती उतारी गई। मां सरयू का अभिषेक पूजन कर सुगंधित पुष्पों से झांकी भी सजाई गई। इसी तरह सरयू सेवा समिति, सरयू घाट पंडा कमेटी सहित अन्य संस्थाओं ने भी पावन सलिला सरयू की महाआरती का आयोजन किया। इस दौरान सरयू घाट पर आस्था का संगम नजर आया, जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय नजर आ रहा था।
पूर्व मंत्री ने भी उतारी सरयू की महाआरती
अयोध्या। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संत तुलसीदास घाट के पास दिव्य मां सरयू आरती सेवा संस्थान के संयोजन में मां सरयू की महाआरती का आयोजन किया गया। संस्थान के अध्यक्ष महंत रामदास करतलिया के संयोजन में मां सरयू की विविध प्रकार के आभूषणों व पुष्पों से झांकी सजाई गई। शाम को मां सरयू की 5100 बत्ती की महाआरती मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय ने उतारी। इस दौरान महंत विजयरामदास, महंत कन्हैया दास, महंत राममोहन दास, श्रीचंद यादव आदि मौजूद रहे। संवाद