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Ayodhya News: जनता ने खोल दी पार्कों के निर्माण में धांधली की पोल

Mon, 05 Jun 2023 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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संवाद न्यूज एजेंसीअयोध्या। नगर निगम के इंजीनियरों और अफसरों की कारगुजारी देखनी हो तो रोहिणीनगर में बन रहे पार्क देखिए। यहां निर्माण का न कोई मानक है, न ही नियम कायदे। शायद ठेकेदार ऐसा काम करके भुगतान भी ले लेते, लेकिन जागरूक जनता ने उनके इस खेल की पोल खोल दी। पहले घटिया बाउंड्री हटानी पड़ीं, अब टाइल्स हटानी पड़ रही हैं।
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रोहिणीनगर के सबसे बड़े पार्क का निर्माण एक महिला ठेकेदार के पास है। जब लोगों ने शनिवार को यहां खराब निर्माण को लेकर विरोध जताया तो वह नागरिकों से भिड़ गईं। कई घंटे हाईप्रोफाइल ड्रामा चला। तब पुलिस बल और सहायक नगर आयुक्त विपिन द्विवेदी ने वहां पहुंचकर मामले को किसी तरह शांत कराया। निर्माण सामग्री खराब पाए जाने पर दोबारा टाइल्स लगाने का निर्णय लिया गया। इस विवाद के कई वीडियो शहर में खूब वायरल हो रहे हैं।
नगर निगम शहर में करीब 5.5 करोड़ रुपये से 33 पार्कों का निर्माण करवा रहा है। यानी औसतन एक पार्क पर 17 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसमे से ज्यादातर पार्क बेहद छोटे हैं। ऐसे ही चार पार्क साहबगंज के निकट रोहिणीनगर में बन रहे हैं। इसमें हर पार्क में लगने वाले गेट का वजन किसी मानक के अनुसार नहीं बल्कि ठेकेदार की मर्जी पर है। कोई मजबूत है तो कोई बेहद हल्का। बाउंड्री के लिए जो सीमेंटेड जालियां इस्तेमाल की जा रही हैं, उनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है। इसके अलावा टाइल्स लगाने के लिए लोवर कास्ट नहीं की जा रही है। मिट्टी पर मसाला लगाकर टाइल्स चिपकाई जा रही हैं। उसमें भी सीमेंट इतनी कम है कि हाथ लगाते ही टाइल्स उखड़ जाती हैं।
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जनता ने हंगामा किया तो ये सारी बातें सच साबित हुईं और अंतत: सबसे बड़े पार्क की टाइल्स अब हटाई जा रही हैं। सीमेंटेड बाउंड्री की जालियां पहले ही बाहर फेंकी जा चुकी हैं। उनकी गुणवत्ता बहुत खराब है। उस पर निर्माण कार्यों के प्रभारी अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय कहते हैं कि इन निर्माण कार्यों की नियमित जांच होती है। संबंधित जेई उन्हें फोटो भी भेजते रहते हैं। कहते हैं कि यदि निर्माण में खामी होगी तो ठेकेदार फर्म और जेई पर कार्रवाई होगी। किंतु सवाल यह है कि खराब निर्माण होते समय ही क्यों नहीं रोका जा रहा है?


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जनता बोली -
पार्कों के निर्माण में खूब मनमानी हो रही है। कोई देखने वाला ही नहीं है। 1988 के बाद अब पार्क बन रहे हैं। कम से कम अब तो ठीक से बना दें। जनता को हंगामा करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।
- राकेश गुप्ता, रोहिणी नगर

ठेकेदार किसी की नहीं सुनतीं
जिस तरह से पार्क में मनमाने तरीके से निर्माण हो रहा है और ऊपर से ठेकेदार ने जो अभद्रता की, वह हैरान करने वाला है। ठेकेदार न किसी अधिकारी की बात सुनती हैं, न पुलिस या पार्षद की। ऐसे में काम कैसे ठीक हो पाएगा।
- जेपी राय, रोहिणीनगर

ठेका देने में किया खेल
ठेके में ही खेल हुआ है। गलत कागजात के बावजूद ठेका दिया गया है। पार्कों के निर्माण की ही नहीं ठेके की प्रक्रिया और कागजात की भी जांच होनी चाहिए। मैं मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर सभी अधिकारियों और महापौर तक से शिकायत कर चुका हूं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उल्टे ठेकेदार कई अफसरों को भी डांट देती है।
- रामभवन, क्षेत्रीय पार्षद
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खराब निर्माण मिला तो कार्रवाई क्यों नहीं?
रोहिणीनगर में नगर आयुक्त विशाल सिंह जब लोगों की शिकायत पर आए थे तो उनके निर्देश पर ही बाउंड्रीवॉल की खराब जालियां उखड़वाई गई थीं। अब टाइल्स उखाड़नी पड़ रही हैं। बड़ा सवाल है कि आखिर अफसर किस दबाव में कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
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कमी मिली तो रुकेगा भुगतान
सभी 33 पार्कों का निर्माण अंतिम चरण में है जिसका मैं खुद निरीक्षण करूंगा। तकनीकी जांच भी कराई जाएगी। इससे पहले किसी का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि कहीं कोई कमी मिली तो भुगतान नहीं किया जाएगा। साथ ही संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर पर भी कार्रवाई होगी।
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- अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त
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