पहाड़ों पर हो रही बारिश व नेपाल से छोड़े गए पानी से उफनाई सरयू ने लाल निशान पार कर लिया है। अब तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का कहर तेज हो गया है। नदी की जलधारा कछार के गांवों को अपने आगोश में लेने लगी हैं।
सदर तहसील के आधे दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कछार के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं। बाढ़ से भयभीत गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की कवायद में जुट गए हैं। प्रशासनिक मशीनरी भी हरकत में आ गई है।
लेखपालों को प्रभावित इलाकों में कैंप करने के निर्देश दिए गए हैं। सप्ताह भर से उफनाई सरयू के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से हलचल थी, लेकिन मंगलवार को लाल निशान पार करते ही नदी कछार के बड़े भूभाग को अपने आगोश में समेटने लगी हैं।
स्थिति यह है कि तेजी से बढ़ते जलस्तर में रुक-रुक कर हो रही वृद्धि से अयोध्या-बिल्वहरिघाट व चिर्रा खजुरी बंधे पर कटान का खतरा भी बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, नदी का जलस्तर मंगलवार की भोर लगभग दो बजे खतरे के निशान 92.730 मीटर को पार कर तेजी से बढ़ते हुए शाम चार बजे 92.820 मीटर तक पहुंच गया।
बुधवार को जलस्तर के 92.950 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है। सरयू में आई बाढ़ से प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया है। पूराबाजार प्रतिनिधि के मुताबिक, तटीय क्षेत्र के मूड़ाडीहा, उरदहवा, पूरे चेतन, सलेमपुर, पिपरी संग्राम, बाबा का पुरवा, मड़ना माझा, बलुइया माझा आदि गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं। बाढ़ के बढ़ते पानी से भयभीत परिवार अपने मवेशियों के साथ ही राशन आदि सामानों को उपरहार के सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जुगत में जुट गए हैं। मूडाडीहा ग्राम पंचायत के अंतर्गत माझा पिपरी संग्राम में कटान तेज हो रही है।
दूसरी ओर मूडाडीहा ग्रामसभा में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने का मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। स्कूल जाने के लिए नन्हे-मुन्ने बाढ़ के पानी में घुसकर जाने के लिए विवश हैं।
कक्षा चार में पढ़ने वाले विजय पाल, ममता, कक्षा पांच में पढ़ने वाले मनोज व हरिपाल कहते हैं कि अपने भविष्य को संवारने के लिए स्कूल जाना जरूरी है लेकिन बाढ़ का पानी व कटान देखकर डर बना रहता है। कक्षा चार में पढ़ने वाले संजय निषाद के पिता सेठ निषाद कहते हैं कि जिंदगी से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
इसी कारण बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे। मूडाडीहा ग्राम प्रधान तेज बहादुर निषाद कहते हैं कि अभी स्कूल परिसर में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। लेकिन मुख्य मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। जल्द ही बीएसए से मिलकर बाढ़ के समय स्कूल बंद कराने की मांग की जाएगी।