साध्वी ऋतंभरा ने शनिवार को आयोध्या पहुंचकर रामलला का दर्शन करने के बाद महंत नृत्य गोपाल दास का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि रामलला का दर्शन कर धन्य हो गई, आज युगों की साधना सफल हुई। कहा, साधना कभी व्यर्थ नहीं होती, जब चलते हैं अनवरत चलते हैं, गिरते हैं, संभलते हैं लेकिन अंत में मंजिल जरूर मिलती है। अब मंजिल क्या है, भगवान के मंदिर के साथ अयोध्या में एक ऐसा सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना हो जिससे सारा समाज मानवता, सहजता, संबंधों के महत्व, त्याग व परीक्षा का संदेश पूरे विश्व को दें।
हम कैसे अपनों के लिए जीवन जीते हैं, इसकी स्थापना अयोध्या धाम से होगी। इसको सोचकर ही जीवन रोमांचित हो जाता है। अयोध्या में शहीद हुए कारसेवकों के बारे में कहा कि जिन्होंने अपना जीवन रामलला के लिए समर्पित किया है, इसकी प्रेरणा आगे आने वाली संतानों को मिले इसके लिए उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर प्रार्थना करती हूं कि लोग उनसे प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।