फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमसा का उद्धार, बिसुही की बारी, तिलोदकी अधर में

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। पुराणों में वर्णित मांडव्य ऋषि की तपस्या से उत्पन्न हुई तमसा का जिले में उद्धार हो गया। यह पानी से लबालब लहलहा रही हैं। अब बिसुही के उद्धार को लेकर कवायद है लेकिन तिलोदगी गंगा अभी अधर में है। जबकि सबसे पहले इस पर ही काम शुरू हुआ था।
विज्ञापन

तिलोदकी गंगा (तिलैय्या) के उद्धार को लेकर काम सन 2018 में ही शुरू हो गया था। इसके प्रमुख स्थल पौराणिक ऋषि रमणक स्थल पर स्थित पंडितपुर गांव में यह अब भी बह रही है। इसका काम यहीं से शुरू कराकर आगे अयोध्या तक इसके पुनरूद्धार की रणनीति थी। पंडितपुर गांव में मनरेगा के तहत इसकी सफाई के साथ ही इसके एक सिरे पर खुदाई का काम भी शुरू किया गया था लेकिन इसके बाद इस पर ग्रहण लगा तो अब तक लगा है।
इसके पीछे बड़ा कारण नहर विभाग बना। तिलोदकी के ऊपर से निकलने वाली माइनर इसी पर कट गई। लगातार दो साल से इसे गर्मी तक भरे रहती है। जिसके कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। राजस्व विभाग ने भी इसको लटकाने में भूमिका निभाई। सीडीओ ने मई 2019 में एसडीएम सदर और सोहावल को पत्र लिखकर अभिलेखों के मुताबिक अतिक्रमण मुक्त कराकर गांववार सूची सौंपने के लिए कहा था लेकिन आठ महीने बाद भी दोनों तहसीलों ने कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया।
विज्ञापन

तिलोदगी के बाद जनवरी सन् 2019 में तमसा के उद्धार की कार्ययोजना बनी और जून तक यह नदी के स्वरूप में आ गई। इस पर भी अतिक्रमण था, हटाया गया, बड़ा काम था लेकिन यह ऐतिहासिक काम पूरा हो गया। अब तमसा पानी से लबालब लहलहा रही है। तिलोदकी को अधर में छोड़ एक बार फिर बिसुही के उद्धार की कवायद शुरू की गई है। इसका सवेज्ञ कराए जाने की तैयारी है। लोगों का कहना है कि बेहतर होता कि पौराणिक नदी तिलोदगी गंगा (तिलैय्या) का उद्धार होता। हालांकि, नए मुख्य विकास अधिकारी को अभी इसके बारे में शायद विस्तृत जानकारी नहीं थी। मुख्य विकास अधिकारी प्रथमेश कुमार का कहना है कि इसके साथ ही तिलोदकी गंगा (तिलैया) को दिखवाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें