अयोध्या। कोरोना वायरस के चलते देश भर में लॉकडाउन लगाया गया है। इस दौरान व्यापारिक एवं औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। यह स्थित रामनगरी में सरयू के लिए बहुत ही बेहतर साबित हो रही है। पिछले वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर करें तो सरयू के जल में बड़ा परिवर्तन सामने आ रहा है। सरयू में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा बढ़ गई है। सरयू की तस्वीर बदल चुकी है, जलधारा इतनी स्वच्छ हो गई है कि पहले ऐसा कभी नहीं दिखा।
धर्म और आस्था की नगरी अयोध्या में पावन सलिला सरयू को लेकर गहरी श्रद्धा है। इधर कुछ वर्षों से नदी में गिर रहे नालों एवं यश पेपर मिल के कचरे व पानी से सरयू निरंतर प्रदूषित हो रही थी। हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक देश की अन्य नदियों के मुकाबले में सरयू में अभी भी कम प्रदूषण है, इसका पानी आचमन लायक है।
इसी का परिणाम है सरयू में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान करते हैं तो वहीं पर्व एवं त्योहारों के अवसर पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। अब कोरोना वायरस के चलते घोषित लॉकडाउन के कारण सरयू की सूरत बदल गयी है और नदी की जलधारा पहले से और भी अधिक स्वच्छ हो गयी है। लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए सरयू जल के नमूनों की ताजा रिपोर्ट भी कुछ यही बता रही है।
सरयू जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा (डीओ) 9.1 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो कि चार से अधिक होनी चाहिए। लॉकडाउन से पहले डीओ की मात्र अमूमन 6 के आसपास होती थी। वहीं बीडीओ की मात्रा घटकर 2.5 मिलीग्राम प्रति लीटर आ गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक सरयू का जल पहले भी काफी हद तक स्वच्छ रहता था क्योंकि नदी में यश पेपर मिल को छोड़कर अन्य किसी उद्योग का पानी नहीं आता था। जो कचरा आता भी है, उसे नदी प्रकृति से ऑक्सीजन लेकर साफ कर देती है। वहीं लॉकडाउन में स्थिति में काफी सुधार हुआ है, सरयू का जल अत्यंत स्वच्छ हो चुका है।
लॉकडाउन के बाद लिए गए सरयू जल के नमूनों की रिपोर्ट के मुताबिक नदी का जल स्वच्छ हुआ है। गंदगी के मानक बीओडी की मात्रा में कमी आई है, जबकि जलचरों के लिए घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ गयी है। चंद दिनों में ही सरयू का जल काफी स्वच्छ हो गया है। पिछले सालों के मुकाबले भी जल की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
स्वामीनाथ राम, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अयोध्या